Wednesday, May 17, 2017

अमरत्व

अमरत्व
अमरत्व क्या है सोंचने की बात
अपने जीवन का मना लो उत्साह
बहुत मुश्किल से मिलता है मानव जीवन
करने पड़ते है बहुत तप और मनन
अपने जीवन में करो चितंन
खोजो अपने उद्देश्य को
भटको इधर-उधर
हमेशा सिर्फ अपने दिल की सुनो
रास्तों के उतार चढ़ाव से डरो
जीवन में कोई भी अमरत्व का फल खाकर नहीं आता
परंतु निश्चित ही वह अमरत्व को पाता जो
अपने जीते-जी अपने और अपनों के ही नहीं
दूसरों के काम आता है

सच मायनों वही मनुष्य अमरत्व को पाता।

डॉ साधना श्रीवास्तव 

Wednesday, May 3, 2017

क्या वो अनाथ था

क्या वो अनाथ  था

आज देखा फिर उसे चौराहे पर

 कुछ मैले और गंदे से थे कपड़े और बिखरे से  बाल उसके

मासूम आखों में हज़ारों सवाल

देखने मे भूख और प्यास से बेहाल
 
दूर से दिखती थी उसकी बेबसी

भेद गयी थी अंतस  को मेरे
 
भीग गए थे मेरी भी आँख के कोने

दिल पसीज गया था देख उस  अनाथ की दशा
 
पैसों और भीख देना था पाप

सोचा कर दू एक वक़्त खाने का उसका इंतजाम

पिछली  बार की तरह वो खुश हो गया मुझे देख के

पेट की भूख शांत हो गयी उसकी आखों में थे करुणा के भाव

सोचती काश होता उसका भी परिवार

उस अनाथ को भी न होता किसी बात का अभाव

दिन बीते महीने और कुछ साल गये

छूट गया वो शहर मेरा क्योकि मुझको भी करने थे कई काम

कुछ सालो बाद जब लौटी उस चौराहे पे जिसपे मिलता था

वो अनाथ कुछ सालो पहले

मुझको उस बच्चे को देखने की थी चाह

काम सभी निपटा जब पहुंची उस चौराहे पर

सर्द बहुत थी रात कालिमा घनी

दूर दूर तक सन्नाटे का वास

दर्द से मेरा सीना भर आया

मेरी  आखों आँसू नहीं गुस्से का था सैलाब

जब देखा नहीं वो अनाथ नहीं था

 था उसके साथ उसका पूरा परिवार

इस बार दो बच्चे उससे भी छोटे थे

भूख नहीं गरीबी नहीं न थी कुछ कुछ मजबूरी

भीख मांगना  था कमाई का जरिया

दूर  उसने देखा जान गया था वो भी मेरे भाव

कुछ शब्द नहीं न थे अब कुछ भाव

लौट गयी मैं बिन कुछ बोले

सोच रही थी कैसा था उसका परिवार

इससे भला तो वो होता अनाथ



 डॉ  साधना श्रीवास्तव