Friday, June 19, 2015

निगेटिव -1





इंसान जब उदास होता तो उसे कुछ नही दिखाई देता मंजिल की तलाश में भटकते अपनो और परायो के बीच सकून और रिश्ते खोजता हैं मेरी कहानी निगेटिव का हीरो भी ज़िंदगी की भाग दौड़ ऐसा अकेला हो गया। .
यू तो  उसके पास सब था और देखो तो कुछ नही था। ……।

 ऐसा क्या हुआ उसके साथ और वो कैसे अपने  होसलो से दुनिया से लड़ गया जानना चाहते है तो देखते रहिये मेरा ब्लॉग। अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ तो जरूर शेयर करे 

सपनों को सच करने का रास्ता बताती हिन्दी भाषी युवक के सफलता की कहानी मंजिले 5

सपनों को सच करने का रास्ता बताती हिन्दी भाषी युवक के सफलता की कहानी   मंजिले  5 
आकाश ने खीच कर उसके गाल पर थप्पड़ मारा। बोला - ’’नहीं दीपक मैंने कभी कहा नहीं तुम बहुत अच्छे -- बहुत अच्छे इस तरह से टूटो मत। तुम्हारे जैसे अच्छे और ईमानदार लोग मिलते कहाँ है ? तुम्हें हर हाल में जीतना होगा। माना हम दोनों अलग स्वभाव के है। लेकिन तुम बहुत सच्चे हो। मैं नही चाहता तुम परेशान हो --- उदास हो जाओंगे तो मुझे बहुत बुरा लगेगा। तुमको हर हाल में जीतना होगा। यू निराशा की बातें मत करो। मैं और तुम दो अलग विचारधारा के है, परंतु मैं चाहता हूँ कि हम दोनों की विचारधारा में जीत तुम्हारी हो।’’
                   आकाश में इतना समझाने पर दीपक को थोड़ी शांति मिली। उसे लगा कि वह अकेला नहीं है कोई तो है जो साथ है। हमदर्द है। हमराज है। दीपक मुँह हाथ धोकर जब वापस लौटा तो आकाश ने मुस्कुराते हुये कहा - ’’अब कैसा महसूस हो रहा है। चल अब मैं खुशी की दवाई देता हूँ देखना तेरा गम खत्म हो जायेगा।’’
’’मतलब’’ ?
’’मतलब यह पी लो सब ठीक हो जायेगा’’ कहते हुये आकाश ने बीयर की बोतल निकाली। दीपक सकपका गया - ’’यह क्या हैं मैं शराब नहीं पीता’’
’’अरे यार यह शराब थोड़े है यह तो टेंशन दूर करने की दवाई है।’’
                   उस रात पहली बार दीपक ने बीयर का स्वाद चखा। फिर गहरी नींद में सो गया। सुबह आकाश ने उठाया। दीपक का सिर थोड़ा भारी था। उठते-उठते उसे चार्ट का बंडल और सीनियर की बात याद गयी।
                   उसने आकाश से पूरी बात बतायी तो आकाश ने कहा-’’बस इतनी सी बात यह प्राब्लम तो चुटकी में खत्म हो जायेगी’’
’’क्या तेरी ड्राइंग बहुत अच्छी है’’
’’नहीं अब बस तुम देखते जाओ’’ यह कहने के साथ आकाश ने चार्ट का बंडल उठाया और गुनगुनाता हुआ कमरे से बाहर निकल गया।
                   शाम को जब लौटा तो उसके हाथ में 15 नहीं 20 चार्ट थी। वह भी सब बनी-बनायी रंग-बिरंगी। दीपक ने आश्चर्य से पूछा - ’’यह कैसे’’ आकाश ने गर्व से कहा - ’’मैं कुछ फाइन आर्टस के स्टुडेन्ट्स को जानता था। उन्हीं को कुछ पैसे दिये और तैयार की गयी चार्ट।’’
                   अगले दिन की पार्टी तो किसी जश्न से कम थी। उस पार्टी में बहुत मस्ती, बहुत धमाला था। सभी लड़के-लड़कियाँ मिल जुल कर गेम्स, गाना, डांस, जोक्स, फैशन शो और ढेरो मस्ती कर रहे थे। पार्टी के अगले दिन दीपक ने आकाश की सलाह से एक ट्यूशन ब्यूरों में संपर्क किया। वहाँ से उसने शाम के समय के लिए 2-4 ट्यूशन पकड़े ताकि वह अंग्रेजी की क्लास के लिए पैसे जुटा सके।
                   दीपक ने शहरी माहौल के अनुसार खुद को ढालना शुरू कर दिया। इसमें आकाश उसका साथ देता। धीरे-धीरे समय बीतने लगा। दीपक को मेहनत ज्यादा पड़ती लेकिन वह धीरे-धीरे अपने विषय को समझने लगा था। ट्यूशन, इंग्लिश ग्लास और पढ़ाई सब एक साथ कर रहा था।
                   इन कोशिशों में धीरे-धीरे दीपक सफल भी होने लगा। उसका व्यक्तित्व निखरने लगा। दीपक के कपड़े, बाल, रहन-सहन सब बदलने लगा। परीक्षा आते-आते दीपक पूरे कालेज में सभी का चहेता बन गया। सब दीपक को जानने और पहचानने लगे। एक बार दीपक फिर सबकी प्रेरणा बन गया।
                   कालेज के हर प्रोग्राम में वह शामिल होता। सभी उसकी मिसाल देते कि कैसे एक सीधा-साधा गाँव से आया भोला-भाला नौजवान शहरी सिर्फ तौर-तरीके सीख रहा बल्कि हर चुनौती का मुकाबला कर रहा है। वह बहुत सी प्रतियोगिताओं का विजेता बना। दीपक की हिन्दी के सभी कायल थे। उसकी आवाज बहुत अच्छी थी। जब वह गाना गाता तो सभी मंत्रमुग्ध होकर सुनते।
                   सोनालिका शर्मा भी दीपक के गाने मेहनत की बहुत कद्र करती थी। जब भी दीपक की हिम्मत टूटती या फिर वह मुश्किल में पड़ता तो आकाश और सोनालिका ही उसे दिलासा देते थे।
                   जैसे-जैसे परीक्षा की घड़ी नजदीक रही थी वैसे-वैसे दीपक की कोशिशे बढ़ रही थी। कभी-कभी तो पूरी-पूरी रात दीपक पढ़ाई करता। उस रात भी दीपक पढ़ाई कर रहा था उसने देखा पहली बार आकाश अपने लैपटाॅप पर देर रात तक काम कर रहा था।
                   दीपक ने आश्चर्य से पूछा - ’’यार आज तेरी तबीयत तो ठीक है जो तुम इतनी रात तक पढ़ाई कर रहे।’’
                   आकाश ने कहा ’’तबीयत खराब हो मेरे दुश्मनों की और कमबख्त पढ़ाई कर रहा है।’’
’’तो फिर तुम क्या कर रहे हो ?’’
’’तुम्हें नहीं पता यार मैं अपने दिल का हाल लिख रहा।’’ आकाश ने एक लम्बी, ठंडी सांस भरते हुये कहा।
’’दिल का हाल मतलब’’ -- दीपक ने पूछा    
कुछ नहीं यार कल वेलेन्टाइन डे है और मैं अपनी गर्लफ्रेन्ड के लिए अच्छी-अच्छी स्लाइड तैयार कर रहा हूँ। जिसे मैं रात के बारह बजते ही मेल कर दूँगा।’’
दीपक ने कहा - ’’इसकी इतनी जल्दी भी क्या है ? परीक्षा नजदीक रही और तुम अपना वक्त बेकार कर रहे हो।’’
आकाश ने कहा - ’’जल्दी इसलिए है क्योंकि कल वेलेटाइन डे है और अगर कल मैं अपनी चाहत का इजहार कर पाया तो बहुत देर हो जायेगी।
’’क्यों’’
’’क्योंकि कल अगर किसी और ने मेरी चाहत, मेरी जान विजया को किसी और ने प्रपोज कर दिया तो --
’’तो क्या जो तुम्हारा है वह किसी और का नहीं हो सकता और जो किसी और का है वह तुम्हारा नहीं हो सकता ---प्यार---चाहत नहीं यह समय पढ़ने-लिखने और कैरियर बनाने का हैं।’’ दीपक ने कहा।
                   ’’तो तुम बनाओ अपना कैरियर मैंने मना किया तुम्हें बल्कि तुम्हारी मदद ही करता हूँ तो तुम क्यों मेरे प्यार के दुश्मन बने हो।’’ आकाश ने झल्लाकर कहा।
                   ’’नहीं यार मैं तुम्हारे प्यार का दुश्मन नहीं तुम्हारा दोस्त हूँ तभी तुम्हारी चिन्ता होती है। मैं क्यों चाहूँगा कि तुम्हारा प्यार किसी और का हो। लेकिन क्या करूँ मुझे यह प्यार-व्यार का चक्कर समझ ही नहीं आता -- मैं तो बस अपने माँ-बाबा और गाँववालों के सपने पूरे करने आया हूँ।’’ दीपक ने उदास स्वर में कहा।
                   आकाश को अपनी गलती का एहसास हो चुका था। उसे भी लगा कि उसने दीपक को कुछ ज्यादा ही तेज स्वर में डांट दिया है। उसने भी अपना लहाजा सुधारते हुये कह कि - ’’अरे यार दीपक तुम तो बेवजह ही उदास हो गये। मेरा यह मतलब नहीं था। देखो हम दोनों अलग-अलग स्वभाव के है। हमारी मंजिल, जीने का तरीका सभी अलग है। मैं तुम्हारी तरह बंधन में, जिम्मेदारियों के बोझ तले घुट-घुट कर नहीं जी सकता। तुम्हारे लिये यह समय किताबों में दम तोड़ने का है तो मेरे लिए जीने का मुझे मेरे तरीके से जीने दो। यार प्यार का अपना रंग होता है किनारों पर बैठकर सभी बातें करते है। बस तुम एक बार उसमें डूबकर देखो जिन्दगी कितनी हसीन हो जाती है। यह कितना खूबसूरत एहसास है एक बार जीकर देखा। कल प्यार का दिन है। प्यार करने वालों का दिन है और मैं भी अपनी विजया को कल प्रपोज करना चाहता हूं --- समझे ----किसी का साथ हो तो जिन्दगी हसीन बन जाती है।’’

                   दीपक ने हाँ में सिर हिला दिया। सच तो यह था कि प्यार के बारे में इतना सुनने के बाद दीपक को पहली बार अपने जीवन में किसी हमसफर की कमी महसूस हुयी।


__ आगे की कहानी आप जानना चाहते है तो मेरा ब्लॉग देखते रहे कथा काल्पनिक है.... मौलिक है किसी से जुड़ाव संयोग मात्र है   
 साधना श्रीवास्तव