Friday, August 25, 2017

सत्य से साक्षात्कार एक बार

सत्य से साक्षात्कार एक बार
अंतिम सत्य है वह, 
मेरे ही नहीं सब के लिए,
कैसा होगा वह क्षण जो उससे होगा मिलन, 
कभी डर लगता तो कभी होती है, 
उत्सुकता पूरे शरीर में, 
एक क्षण में रूक जायेगा रक्त का बहाव,
 या पहले होगी हृदय गति बंढ, 
हाथ पाॅव के साथ पूरा शरीर जमने लगेगा बर्फ सा उसी क्षण मुक्त हो जाऊॅगी, 
 हर बंधन से शरीर में अकड़न और उस क्षण सांसे रूक जायेगी होता ह,ै 
आशान मृत्यु का तब करीब आ जाती है ।
जीवन के एहसास होती है जीवन की खूबसूरती यादें आने लगते है ,
सारे अधूरे काम अचानक से बढ़ जाता है, 
रिश्तों से मोह बस उसी पल होता है ,
सत्य से साक्षात्कार मैं अपनी उदासी से जाग जाती है, 
बस जी लेना चाहती हूॅ जिंदगी को खुलकर मृत्यु से पहले एक बार। 

Tuesday, August 15, 2017

Wednesday, May 17, 2017

अमरत्व

अमरत्व
अमरत्व क्या है सोंचने की बात
अपने जीवन का मना लो उत्साह
बहुत मुश्किल से मिलता है मानव जीवन
करने पड़ते है बहुत तप और मनन
अपने जीवन में करो चितंन
खोजो अपने उद्देश्य को
भटको इधर-उधर
हमेशा सिर्फ अपने दिल की सुनो
रास्तों के उतार चढ़ाव से डरो
जीवन में कोई भी अमरत्व का फल खाकर नहीं आता
परंतु निश्चित ही वह अमरत्व को पाता जो
अपने जीते-जी अपने और अपनों के ही नहीं
दूसरों के काम आता है

सच मायनों वही मनुष्य अमरत्व को पाता।

डॉ साधना श्रीवास्तव 

Wednesday, May 3, 2017

क्या वो अनाथ था

क्या वो अनाथ  था

आज देखा फिर उसे चौराहे पर

 कुछ मैले और गंदे से थे कपड़े और बिखरे से  बाल उसके

मासूम आखों में हज़ारों सवाल

देखने मे भूख और प्यास से बेहाल
 
दूर से दिखती थी उसकी बेबसी

भेद गयी थी अंतस  को मेरे
 
भीग गए थे मेरी भी आँख के कोने

दिल पसीज गया था देख उस  अनाथ की दशा
 
पैसों और भीख देना था पाप

सोचा कर दू एक वक़्त खाने का उसका इंतजाम

पिछली  बार की तरह वो खुश हो गया मुझे देख के

पेट की भूख शांत हो गयी उसकी आखों में थे करुणा के भाव

सोचती काश होता उसका भी परिवार

उस अनाथ को भी न होता किसी बात का अभाव

दिन बीते महीने और कुछ साल गये

छूट गया वो शहर मेरा क्योकि मुझको भी करने थे कई काम

कुछ सालो बाद जब लौटी उस चौराहे पे जिसपे मिलता था

वो अनाथ कुछ सालो पहले

मुझको उस बच्चे को देखने की थी चाह

काम सभी निपटा जब पहुंची उस चौराहे पर

सर्द बहुत थी रात कालिमा घनी

दूर दूर तक सन्नाटे का वास

दर्द से मेरा सीना भर आया

मेरी  आखों आँसू नहीं गुस्से का था सैलाब

जब देखा नहीं वो अनाथ नहीं था

 था उसके साथ उसका पूरा परिवार

इस बार दो बच्चे उससे भी छोटे थे

भूख नहीं गरीबी नहीं न थी कुछ कुछ मजबूरी

भीख मांगना  था कमाई का जरिया

दूर  उसने देखा जान गया था वो भी मेरे भाव

कुछ शब्द नहीं न थे अब कुछ भाव

लौट गयी मैं बिन कुछ बोले

सोच रही थी कैसा था उसका परिवार

इससे भला तो वो होता अनाथ



 डॉ  साधना श्रीवास्तव 

Sunday, April 30, 2017

सामुदायिक रेडियो और सामाजिक मूल्य -एक विश्लेषण

    सामुदायिक रेडियो और सामाजिक मूल्य -एक विश्लेषण
                       ( लखनऊ के विशेष संदर्भ में)  
डॉ. साधना श्रीवास्तव             
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसके जीवन में आदर्श और मूल्यों का विशेष स्थान होता है।मूल्य वह होते है जिनके द्वारा मनुष्य का जीवन उन्न्त और सुन्दर बनता है।
इन मूल्यों को  जीवन में अपनाने से ना सिर्फ चरित्र निर्माण बल्कि जीवन के मार्ग में आगे बढ़ने के सुअवसर प्राप्त होते है।
 मूल्यों को हम अनेक रूपों में देखते जैसे कि 1 जीवन मूल्य 2 व्यक्तिगत मूल्य 3 सामाजिक मूल्य  4 राष्टीय मूल्य 5 अन्तर्राष्टीय मूल्य आदि। 1
इन मूल्यों का निर्माण व्यक्ति के परिवार ,आस पड़ोस और अनेक माध्यमों से होता है।इन सब के साथ ही मूल्यों के निर्माण में शिक्षा का भी विशेष महत्व होता है। अच्छी शिक्षा से मूल्य शिक्षा प्रदान कर सकते है।स्कूल कॉलेज के सिवा शिक्षा के क्षेत्र में रेडियो भी अहम भूमिका निभा रहा है।रेडियो कार्यक्रमों की विभिन्न विधाओं जैसे-लघु कथाएं,नाटक,गीत,कविता,विशेष व्यक्तियों से मुलाकात ,वार्ता,परिचर्चा,प्रश्नमंच ,रूपक आदि के माध्यम से रेडियो लोगो में सूचना,शिक्षा और मनोरंजन के साथ मूल्यों और आदर्श की जानकारी भी दे रहा है।इन कार्यक्रमों को विद्यालय की प्रार्थना सभा में कक्षा में,सामुदायिक केन्द्रों में चलाया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का प्रयोग करके शिक्षक और छात्र सामुदायिक परिचर्चा का प्रयोग करके प्रभावी सेचार कर रहे है। रेडियो के अनेक रूपों में सामुदायिक रेडियो की भी एक है।यह अवधारणा 1995 से भारत में आयी।सामुदायिक रेडियो वह माध्यम है, जिसमें किसी समुदाय की विशेष की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक निश्चित भू-भाग के अन्दर रेडियो कार्यक्रमों का प्रसारण करना होता है ।इन प्रसारित कार्यक्रमों में उस समुदाय की सक्रिय सहभागिता होना आवश्यक  है यानि की सरल शब्दो में कहे तो समुदाय के लिए समुदाय के द्वारा समुदाय का प्रसारण ही समुदायिक रेडियो है। यह समुदाय के पराम्पराओं,मूल्यों और संस्कृति और प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता है। ऐसे में मूल्यों के निर्माण में सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रमों किस प्रकार की भूमिका निभा रहे है। प्रस्तुत शोध पत्र में यही जानने का प्रयास किया गया है।प्रस्तुत शोध पत्र को निम्न भागों में बॉंटा गया है-
1 सामुदायिक रेडियों के मूल सिद्वांत में सरकार ने किन-किन स्थानों पर मूल्यों को स्थान दिया है इसका अध्ययन किया जायेगा।
2 लखनऊ सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रमों का  अध्ययन किया जायेगा।
3 सामुदायिक रेडियो की मूल्यों के संरक्षण में भूमिका का वर्णन करना 
4 निष्कर्ष
निदर्शन- लखनऊ के सी एम एस के सामुदायिक रेडियो
पद्धति-कार्यक्रमों का अध्ययन और विशेषज्ञों से चर्चा के द्वारा विषय से सम्बन्धित ज्ञान प्राप्त किया है। द्वितीयक स्रोतों में पुस्तकों, शोध पत्रों का अध्ययन किया गया है। वर्णनात्मक पद्वति का चयन किया गया ।
अध्ययन का उद्देश्य
1 सामुदायिक रेडियो  की प्रकृति में मूल्यों का अध्ययन करना।
2 लखनऊ सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रमों का का अध्ययन करना।
अध्ययन की उपकल्पना-
1 सामुदायिक रेडियो के मूल सिद्वांत में सरकार ने मूल्यों को स्थान दिया है ।
2 सामुदायिक रेडियो की मूल्यों के संरक्षण में भूमिका निभा रहे है।

सामुदायिक रेडियो 
मानव के जीवन में मूल्य शिक्षा बहुत उपयोगी है परिवार ,सामुदायिक केन्द्र ,विद्यालय प्रार्थना सभा ,और सामुदायिक परिचर्चा ,किताबों आदि अनेक मार्ग है ।2
 वही मीडिया में सामुदायिक रेडियो मूल्यों के संरक्षण में  किस प्रकार अहम भूमिका निभा सकता है इस सन्दर्भ में सरकार ने सामुदायिक रेडियो की आवेदन प्रक्रिया से लेकर कार्यक्रमों के निर्माण में निष्पक्षता के साथ पराम्परा और संस्कृति के संरक्षण हेतु अनेक प्रवधान रखे है।जिनका विवरण जानने से पूर्व भारत में सामुदायिक रेडियो केन्द्र शुरु करने के के प्रारम्भिक प्रयासों को एक नजर डालते है-
 1995 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश के निर्णय कि वायु तरंगे सार्वजनिक है के बाद 18 दिसम्बर 2002 को भारत सरकार द्वारा भारत में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को स्थापित करने हेतु नीतिगत दिशा निर्देश को पारित किया था। यह दिशा-निर्देश सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने के इच्छुक व्यक्तियों के एक स्पष्ट रुप से मार्गदर्शिका है। 
वर्ष 2002 में भारत सरकार ने देश में सिर्फ शैक्षणिक संस्थाओं जैसे कि आई0टी0आई, आई.आई.एम., सुस्थापित शैक्षणिक संस्थाओं, स्कूल विश्वविद्यालय आदि को सामुदायिक रेडियो स्टेशन चलाने के लाइसेंस देना प्रारम्भ किया।
सामुदायिक रेडियो स्टेशन के संस्थापन में दूसरा परिवर्तनकारी वर्ष 2006 था, इसमें भारत सरकार ने पुनः सोच-विचार किया और भारत सरकार ने गैर लाभकारी एन.जी.ओ. को सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने के लिए लाइसेंस देने का मन बनाया।3
सामुदायिक रेडियो की मूल्यों के संरक्षण के सन्दर्भ में सरकार की भूमिका-
सम्पूर्ण विस्तृत नीति निर्देशक नौ भागों में बंटी है जो नीति और मूल्यों की रक्षा का कार्य कर रही है।जिनमें जगह-जगह मूल्यों का ध्यान रखा गया है जो कि अग्रलिखित है-
1. मूल सिद्धांतः में मूल्यों का स्थान- नीति-निर्देश का पहला भाग मूल सिद्धांत कहलाता है जिसमें स्पष्ट रुप से उल्लेख है कि सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने के लिए किमी भी संगठन को किन-किन मापदंडो को पूरा करना होगा। कोई भी ऐसी संस्था जो समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रही है, बिना लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य के साथ विकास को प्रतिबद्ध हो और तीन साल का समाज सेवा का कार्य अनुभव को रिकार्ड प्रमाणित करना होता है।
2. जो भी संस्था सामुदायिक रेडियो स्टेशन शुरु करना चाहते हैं, उन्हें स्थानीय स्तर पर अपने समुदाय की पूरी जानकारी होनी चाहिए। अपने समुदाय के प्रति सेवा भाव होना चाहिए।
3. जो भी इच्छुक संस्था सामुदायिक रेडियो शुरु करना चाहते हैं उनका स्वामित्व और प्रबंधन स्वयं का होना चाहिए। जिससे यह स्पष्ट हो कि सामुदायिक रेडियो का संचालन स्वयं करना है जिसका उद्देश्य मात्र सेवा ही है।
4. सामुदायिक रेडियो स्टेशन से जो भी कार्यक्रम प्रसारित होंगे वह स्थानीय समुदाय की शैक्षणिक, विकासात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को समझते हुए उसी के अनुरुप होने चाहिए।
5. सरकार द्वार संस्थाओं के लिए निर्धारित सोसाइटी अधिनियम ;ैवबपमजल ।बजद्ध अर्थात् विधिक कंपनी होनी चाहिए। कानूनी रुप से उसे समिति पंजीकरण अधिनियम अथवा इस प्रयोजन से संबद्ध ऐसे किसी अन्य अधिनियम के तहत होना चाहिए। सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने के आवेदन करते समय संस्था के सभी कानूनी दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है।
सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने के पात्रता मानदंड में मूल्यों की झलक-सरकार ने स्पष्ट से यह उल्लेखित किया है कि कौन सामुदायिक रेडियो खोल सकता है और कौन नही यह जानकारी अग्रलिखित है-
कौन सामुदायिक रेडियो  खोल सकते हैं
कौन सामुदायिक रेडियो नहीं खोल सकते हैं

सामुदायिक रेडियो स्टेशन तीन तरह के संस्था अथवा संगठन खोल सकते हैं। जो भी संगठन नीति-निर्देशों के पैरा - 1 के मूल सिद्धांत में लिखित बातों को पूरा करता है। तीन वर्ष का कार्य अनुभव हो तो कोई सिविल सोसाइटी, स्वैच्छिक संगठन, राज्य कृषि विश्वविद्यालय (एस.ए.यू.), आई.सी.ए संस्थाएं, पंजीकृत सोसाइटी, कृषि विज्ञान केन्द्र, पब्लिक ट्रस्ट जो सोसाइटी अधिनियम में पंजीकृत हों या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो वह सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके अतिरिक्त शैक्षणिक संस्थाएं भी सामुदायिक रेडियो खोल सकते हैं।
भारत सरकार ने अपने नीति-निर्देश में स्पष्ट लिखा है कि कौन-कौन सामुदायिक रेडियो नहीं खोल सकते हैं।
1. किसी व्यक्तिगत को सामुदायिक रेडियो का लाइसेंस नहीं मिलेगा। 
2. किसी भी राजनीतिक दल या उससे जुड़े संगठन (छात्र और महिला संगठन, व्यापार संघों और इनसे जुड़े किसी भी संगठन को लाइसेंस नहीं मिल सकता है।)
3. किसी भी ऐसे संगठन को जो पैसा कमाने और लाभ के लिए सामुदायिक रेडियो खोलना चाहता है उसे लाइसेंस नहीं मिलेगा।
4. केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंध हुये संगठनों को लाइसेंस नहीं मिलेगा।


समुदायिक रेडियो खोलने की आवेदन प्रक्रिया - आवेदन प्रक्रिया आवेदन निम्न चरणों से गुजरती है-  विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और सरकार द्वारा चलायी जाने वाली शिक्षण संस्थाओं को एक एकल स्थल अनुमति ;ैपदहसम ॅपदकवू ब्समंतंदबमद्ध की सुविधा प्राप्त है। उन्हें अन्तर मंत्रालय समिति के द्वारा अनुमोदन जारी किया जाता है। इस समिति की अध्यक्षता सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव करते हैं उन्हें गृह मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय से अलग से अनुमति लेना आवश्यक नहीं होगा। डब्ल्यू.पी.सी. ;ॅच्ब् ॅपदकद्ध विंग से आवृत्ति आवंटन (किस फ्रिक्वेंसी से रेडियो सुनायी देगा।) प्राप्त हो जाने पर पत्र स्व्प् ;स्मजजमत वि प्दजमजद्ध जारी कर दिया जाता है।जो शिक्षण संस्थाएं गैर-सरकारी अर्थात् प्राइवेट हैं और अन्य सभी दूसरे प्रकार के संगठन जो सामुदायिक रेडियो चलाना चाहते हैं, उन्हें रक्षा मंत्रालय और मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ;भ्त्क्द्ध के साथ आवृति आवंटन ;थ्तमुनमदबल ।ससवबंजपवदद्ध की प्रक्रिया के बाद ही आशय पत्र ;स्व्प्द्ध मिलता है। यह आवृति आवंटन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के के द्वारा प्राप्त होता है। 
 कभी-कभी जब एक स्थान के लिए एक से अधिक एकल आवृति वाले आवेदक होते हैं, तो निर्णय के    लिए उनके कागजात उनकी समुदाय की जानकारी और जिस क्षेत्र में जिनके लिए सामुदायिक रेडियो खोल रहे हैं उनके प्रति उनकी प्रतिबद्धता देखी जाती है। 
विज्ञापन  और प्रायोजित कार्यक्रम के  निश्चित नियम-
सामुदायिक रेडियो सिर्फ जनहित के और केन्द्र तथा राज्य सरकारों के प्रायोजित कार्यक्रमों का प्रसारण करने के लिए अधिकृत होते हैं। अन्य किसी प्रकार के प्रायोजित कार्यक्रम नहीं कर सकते हैं।
स्थानीय घोषणा और विज्ञापन के संदर्भ में सरकारों के प्रयोजित कार्यक्रमों के अतिरिक्त स्थानीय समुदाय की घटनाओं स्थानीय कारोबार, स्थानीय महत्व की घोषणा और सेवाओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर नौकरी की खबरों को सीमित तौर पर प्रसारित कर सकता है।ऐसी घोषणाओं और स्थानीय विज्ञापन की अवधि सरकार ने निश्चित कर दी है। यह है कि एक घंटे के प्रसारण में अधिकतम 5 मिनट के विज्ञापन प्रसारित करने की अनुमति सरकार ने प्रदान की है। 
प्राप्त धनराशि सम्बन्धी नीति-निर्देशः- 
सामुदायिक रेडियो को प्राप्त धनराशि का उपयोग सामुदायिक रेडियो मे उपयोग और सहायता के साथ उपकरणों की देखरेख में उपयोग में आयेगा।उसके बाद शेष धनराशि का उपयोग सरकार से पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद सामुदायिक रेडियो संचालक एन.जी.ओं या शैक्षणिक संस्थानों के उपयोग मे लाया जा सकता है। परंतु धन का उपयोग समुदाय की सेवा में लगाया जाना चाहिए। 
कार्यक्रमों का स्वरूप और कार्यक्रमों की विषय-वस्तु और प्रसारण सम्बन्धी नीति-निर्देश भी ऐसे है जो मूल्यपरक है-
1. समुदाय रेडियो द्वारा प्रसारित कार्यक्रम समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरुप और तत्काल संदर्भ से जुड़े होने चाहिए। विषय-वस्तु विकासात्मक, कृषि सम्बन्धी, शैक्षिक, पर्यावरणीय मुद्दे, समाज उत्थान और विकास समुदय के विकास से जुड़े मुद्दे और समुदाय की सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर होते हैं। कार्यक्रमों के निर्माण के समय यह ध्यान भी रखना चाहिए कि कार्यक्रमों स्थानीय सामुदायिक निवासियों की आवश्यकताओं के अनुरुप बनाये जाने चाहिए।  
2. कार्यक्रम की विषय वस्तु में 50 प्रतिशत स्थानीय समुदाय की सहभागिता अवश्य होनी चाहिए।
3. कार्यक्रमों की भाषा स्थानीय होनी चाहिए।
4. सामुदायिक रेडियो स्टेशन को ऑल इण्डिया रेडियो द्वारा निर्धारित कार्यक्रम और विज्ञापन के प्रसारण के लिए बनायी गयी आचार-संहिता और नीति-निर्देशों को पालन करना चाहिए।
5. सामुदायिक रेडियो स्टेशन से प्रसारित सभी कार्यक्रमों की तिथि और सम्ूपर्ण विवरण प्रसारण तिथि के 3 माह बाद तक सुरक्षित रखना होगा।
6. सामुदायिक रेडियो स्टेशन समसामयिक और राजनीति तथा समाचार से सम्बन्धित किसी भी प्रकार के कार्यक्रम का निर्माण और प्रसारण नहीं करेगा।
7. लाइसेंस धारक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह इस प्रकार के कार्यक्रम प्रसारित नहीं करेंगे।
(क) किसी भी भावना या शीलीनता को ठेस पहुंचाता हो।
(ख) किसी भी मित्र राष्ट्र की आलोचना करना, किसी भी धर्म, सम्प्रदाय, समुदाय की भावना के खिलाफ कार्यक्रम या दंगे, हिंसा बढ़ाने वाले कार्यक्रमों का निर्माण ना करना।
(ग) कार्यक्रमों, अश्लील, भद्दी, अपमानजनक, झूठ और आधी-अधूरी जानकारी प्रकट करने वाले नहीं होने चाहिए।
(घ) कानून विरोधी और हिंसा को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम नहीं होने चाहिए।
(ड़) देश की एकता के विरुद्ध कार्यक्रम ना हो और ना ही कोर्ट का अपमान करने वाला है।
(च) सामुदायिक रेडियो स्टेशन देश के राष्ट्रपति या न्यायपालिका के सम्मान के विरुद्ध कार्यक्रम नहीं प्रसारित कर सकते।
(छ) कार्यक्रमें में व्यक्तिगत आलोचना, समाज में या नैतिकता विरोधी कार्यक्रम नहीं बना सकते।
(ज) अंधविश्वास या पाखंड के कार्यक्रम नहीं प्रसारित कर सकते।
(झ) महिलाओं के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकते।
(ट) बच्चों के प्रति कोई अपमानजनक बात नहीं प्रसारित करेगा।
(ठ) शराब, नशा को बढ़ावा देते किसी भी प्रकार के कार्यक्रम प्रसारित नहीं करेगा।
(ड) इन सबके अतिरिक्त प्रसारण में जाति विशेष, धर्म विशेष किसी लिंग, वर्ण, आयु, शारीरिक मानसिक विकलांगता सम्बन्धी बातों को नहीं सम्मिलित करेगा।
(त) लाइसेंसधारी किसी भी सामुदायिक रेडियो कार्यक्रम के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले धार्मिक आधार पर शोषण फलाने वाले कार्यक्रमों का प्रसारण नहीं करेगा। 
                         लखनऊ में सिटी मांटेसरी स्कूल ;ब्डैद्ध के सामुदायिक रेडियो
लखनऊ में सिटी मांटेसरी स्कूल सामुदायिक रेडियो ब्डै गोमती नगर 90.4 मेगाहर्टस और ब्डै एल.डी.ए. कानपुर 90.4 मेगाहर्टस की फ्रिकेवेन्सी पर चला रहा है।वर्ष 2005 में इसको शैक्षणिक रेडियो के लिए लाइसेंस मिला इस दौरान सेलेबस, शैक्षणिक गतिविधियाँ व विषय से सम्बन्धित कार्यक्रम प्रसारित किये जाते रहे जिसमें शिक्षण व छात्र दोनों भाग लेते।2008 में दिल्ली में एक मीटिंग बुलाकर सरकार में निर्देश किये कि ब्डै को सिर्फ शैक्षाणिक नहीं विकास (ग्रामीण विकास) से जुड़े कार्यक्रम बनाये चहिए। तब से के  रेडियो का स्वरूप समुदायिक रेडियो का हो गया। ब्डै स्टेशन चाहते है परन्तु उसे एक फिक्वेंसी -90.4 मेगाहर्टस पर दो स्टेशन चलाने की स्वीकृति मिली।जो कि अग्रलिखित है।
ब्डै गोमती नगर 90.4 मेगाहर्टस ब् डै एल.डी.ए. कानपुर 90.4 मेगाहर्टस
7.11 ।ण् ड 11.3 ।ण्ड
3.7 च्ण्ड 7.11 च्ण्ड
ब्डै के समुदायिक रेडियों का कंट्रोल रूम स्टेशन रोड स्थित ब्डै के हेड व्िपिबम से होता है।
ये दो स्टुडियों है जहाँ कार्यक्रमों का निर्माण, प्रसारण, रिकार्डिग होती है। कभी-कभी आवश्कता पड़ने पर गोमती नगर और एल.डी.ए. ब्डै की ब्रांच स्थित स्टुडियों का उपयोग भी कार्यक्रम के निर्माण के लिए होता है।इसके मुख्य चेयरपरसन जगदीश गाँधी है। समुदायिक रेडियो शुरू करने के पीछे इनका एकमात्र उद्देश्य समाज कल्याण व लोक सेवा है। यद्यपि सरकार ने एक घंटे में 5 मिनट के विज्ञापन की छुट दी है फिर भी यह विज्ञापन प्रसारित नहीं करते है। रेडियो की आय का स्त्रोत ब्डै स्वयं वहन करता है। 
कार्यक्रम का स्वरूप - विकास से मुद्दे जिसमें स्थानीय लोगों की सहभागिता रहती है। हेड आफिस से सामुदायिक रेडियो कार्यक्रमों के प्रमुख वर्गीस कुरियन और आर. के. सिंह है।हर्ष बावा,सोमा घोष,वनिता शर्मा,रविन्द्र त्रिपाठी, के साथ स्थानीय समुदाय के अनेक एंकर और सदस्यों की सहभागिता से कार्यक्रमों का निर्माण किया जाता है।
 सी.एम.एस. कम्यूनिटी रेडियो 90ण्4 मेगाहर्ट्ज पर
प्रसारित विशेष कार्यक्रमों का विवरण
प्रतिदिन स्ांकेत ध्वनि से रेडियो प्रसारण की शुरूआत होती है।कुछ कार्यक्रमों प्रसारण प्रतिदिन होता है।जिनमें अर्चना- अर्चना भक्ति गीतों का कार्यक्रम,बात पते की- उस दिन से जुड़ी रोचक और खास जानकारी,नन्हों की दुनिया- बच्चों का कार्यक्रम जिसमें कविता ,कहानी और एक रोचक सरप्राइज प्रस्तुती ,कम्यूनिटी गतिविधियां- समुदाय की रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर आधरित कार्यक्रम
कार्यकम का नाम कार्यकम का विवरण दिन
अर्चना भक्ति गीतों का कार्यक्रम है जिसमें सर्वधर्म समभाव के आधार पर पॉच भक्ति गीत बजते है। प्रतिदिन
बात पते की उस दिन से जुड़ी रोचक और खास जानकारी देते है। प्रतिदिन
नन्हों की दुनिया बच्चों का कार्यक्रम जिसमें कविता ,कहानी और एक रोचक सरप्राइज प्रस्तुती के अंतगर्त ज्ञानवर्द्वक और मजेदार तरीके से बच्चों में मूल्यों का सृजन किया जाता है। प्रतिदिन
कम्यूनिटी गतिविधियां समुदाय की रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर आधरित कार्यक्रम है। प्रतिदिन
गीतों की झंकार समुदाय की पसंद के गीत समुदाय के कलाकारों द्वारा सुनाये जाते हैं। सोमवार

जनहित में जारी यह लाईन फोन इन कार्यक्रम विशेषज्ञों के माध्यम से सरकारी एवं गैर सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी अपने श्रोताओं तक पहुचाता है।इस कार्यक्रम में कम्यूनिटी श्रोता फोन के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर लाभ उठाते हैं। सोमवार

सिंहासन बतीसी रोचक नाटक सोमवार

नारी शक्ति महिला सशक्तिकरण से सम्बन्धित कार्यक्रम है।
सोमवार

ज्ञान अनुभव की बातें- इसमें सी एम एस के संस्थापक और  और प्रबंधक डा.जगदीश गांधी और निदेशिका डा.भारती गांधी प्रेरक और अनुभवप्रद सीख जीवन के साथ अनुभव ज्ञान की बाते बताते है। प्रतिदिन

प्रेरणादायक प्रेरणादायक गीत में प्रेरणा देते गीत सुनाये जाते है। प्रतिदिन
रेडियो मैगज़ीन ज्ञान तरंग, ज्ञान का हर रंग यह रेडियो पत्रिका विभिन्न विषयों, इतिहास, अर्थजगत, फिल्म, महान व्यक्तित्व... आदि पर संक्षिप्त एवं महत्वपूर्ण जानकारी रोचक ढंग से श्रोताओं तक पहुंचाती है। मंगलवार
आओ सीखे विज्ञान विज्ञान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी रोचक ढंग से श्रोताओं तक पहुंचाती है। म्ांगलवार
आस्था स्थली इस कार्यक्रम में अपने शहर के धार्मिक स्थलों के बारे में विस्तृत 
जानकारी उस परिसर की देखरेख करने वाले सम्बन्धित लोगों से प्राप्त कर श्रोताओं तक पहुंचायी जाती है।
मंगलवार
अंग्रेजी की पाठशाला इसमें अंग्रेजी भाषा की जानकारी रोचक तरह से दी जाती है।
मंगलवार
एक मुलाकात 
इसमें में समुदाय के विशेष लोगों से मुलाकात करवायी जाती है। मंगलवार
हम होगें कामयाब लघु और  कुटीर उद्योगों की जानकारी दी जाती है। मंगलवार
योग और हम   यह लाइव फोन इन कार्यक्रम योग विशेषज्ञ के माध्यम से लोगों 
को योग के प्रति जागरूकता एवं उससे होने वाले शारीरिक एवं मानसिक लाभो से 
अवगत कराता है। इसमें श्रोता फोन के माध्यम से किसी भी विकार को योग से 
कैसे दूर किया जाता है इसकी जानकारी प्राप्त करता है।
बुधवार
रंग मंच इस कार्यक्रम में कम्यूनिटी सदस्यों के माध्यम से नाटकों में, विभिन्न किरदारों के माध्यम से, जीवन सम्बन्धी मूल्यों को समझाया जाता है।
बुधवार
अपना देश इस कार्यक्रम में भारत वर्ष के विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों, अभ्यारण्यों के 
बारे में कम्यूनिटी सदस्यों के माध्यम से विस्तृत जानकारी श्रोताओं तक पहुंचाई 
जाती है।
बुधवार
ज्ञान दर्पण जानकारी आधरित बुधवार
कम्यूनिटी बात-चीत इसमें समुदाय से जुडी जानकारी ,उनके द्वारा की गयी बातें और  स्थानीय कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है।

बुधवार
सरगम शास्त्रीय संगीत पर आधरित कार्यक्रम बुधवार
एक अनोखी उड़ान समुदाय के विशेष लोगों से मिलवाना। वृहस्पतिवार
मन की बात आपके साथ परिचर्चा वृहस्पतिवार
अनमोल रतन इस कार्यक्रम में शहर की महिलाओं की उत्थान एवं विकास की
कहानी उनसे की गई बातचीत के माध्यम से श्रोताओं तक पहुंचाई जाती है। जो 
प्रेरणा का काम करता है। वृहस्पतिवार
किसान मंच यह लाइव फोन इन कार्यक्रम विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों की
 खेती सम्बन्धी समस्याओं के निवारण के साथ-साथ श्रोताओं को भी बागवानी सम्बन्धी जानकारी देता है। वृहस्पतिवार
माटी के गीत लोकगीतों का यह लाइव फोन इन कार्यक्रम जिसमे समुदाय के लोगों को लोकगीतों को सुनने और सुनाने का अवसर मिलता है।
 
शुक्रवार
फोकस सी एम एस के छात्रों की प्रस्तुती शुक्रवार
अजब गजब पिटारा जानकारियां शुक्रवार
युवा मंच यह कार्यक्रम कम्यूनिटी के युवाओं के माध्यम से सम-सामयिक विषयों 
पर परिचर्चाएं करवा युवाओं में प्रेरणा एवं जागरूकता लाने का प्रयास करता ळें
शुक्रवार
ढलती शाम को सलाम यह कार्यक्रम समाज के वरिष्ठजनों को समर्पितहै।जिसमें बुजुर्गों द्वारा जीवन मूल्यों एवं अनुभवों से जुड़ी हुई उनकी अपनीही कहानी उन्हीं की जुबानी श्रोताओं तक पहुंचाई जाती है। शुक्रवार
हमारे व्रत -त्यौहार वनिता शर्मा शनिवार
हम और हमारे कानून इस लाइव फोन इन कार्यक्रम में श्रोताओं को कानूनी सलाह दी जाती है। शनिवार
कम्यूनिटी का कमाल समुदाय के अनोखे सदस्यों से मुलाकात शनिवार
वीरगाथा देश के वीर शहीदों को समर्पित कार्यक्रम शनिवार
जरा बच के एडस जागरूकता पर कार्यक्रम शनिवार
संवाद - एक आशा इस कार्यक्रम मे विभिन्न विषयों पर कम्यूनिटी सदस्यों माध्यम से परिचर्चा आयोजित कर श्रोताओं तक मुद्दो को सरल कर निष्कर्ष तक शनिवार
कम्यूनिटी संगीत इस कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं एवं पुरूषों द्वारा गाये लोक गीतों का प्रसारण किया जाता है। शनिवार
मेरी आवाज मेरी पहचान सी एम एस के छात्रों और अध्यापको की प्रस्तुती रविवार
सेहत की बात - डॉक्टर के साथ इस लाइव फोन इन कार्यक्रम में डाक्टरों के
माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श दिया जाता है। श्रविवार
सी.एम.एस. रेडियो आपके द्वार श्रोताओं के घर जाकर उनकी ही आवाज में उनके गानें,बातों का सीधा प्रसारण रविवार
आइने लखनऊ और हमार जिला लखनऊ बेमिसाल पराम्राओं का शहर- शहर के दार्शनिक स्थलों और स्थनीय समुदाय की जानकारी
रविवार
सुनो कहानी
हमारी रसोई इस कार्यक्रम में कम्युनिटी सदस्यों द्वारा व्यंजन बनाने के तरीके
श्रोताओं तक पहुंचाये जाते हैं।
कल के कार्यक्रम
समापन उद्घोषणा
इन काय्रक्रमों के पहले प्रसारित कार्यक्रमों के अनेक कार्यक्रम ऐसे प्रसारित होते थे जो किसी ना किसी रूप में मूल्यों को भारतीय पराम्रा को संरक्षण प्रइान कर रहे थे जैसे सुनो कहानी जो कि प्रत्येक सोमवार को प्रसारित होने वाला यह कार्यक्रम कहानियों के माध्यम से बच्चो में अच्छे संस्कारों एवं व्यवहारों को उत्पन्न करने का प्रयास करता था। जिसमें कम्यूनिटी के बच्चो के माध्यम से ही इन कहानियों को श्रोताओं तक पहुंचाया जाता था।अम्मा की बातें  कार्यक्रम में वरिष्ठ ग्रामीण महिलाओं द्वारा अनुभव और जीवन सम्बन्धी व्यवहारिक बातों का आदान-प्रदान किया जाता था।साथी हाथ बढ़ाना नामक कार्यक्रम के माध्यम से नित्य नये-नये विषयों से, श्रोताओ को सामाजिक कुरूतियों, अंध विश्वास एवं रोगों सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने का प्रयास था। इसमें कम्युनिटी सदस्य भी सहभागिता करते थे।भविष्य में जमाना बदल गया कार्यक्रम प्रसारित करने की योजना है जो मैग्जीन विधा पर आधरित बेटियों और महिलाओं की समस्याओ का समाधान खोजता कार्यक्रम है।
निष्कर्ष- 
1 सामुदायिक रेडियो के मूल सिद्वांत में सरकार ने मूल्यों को स्थान दिया है ।
  सामुदायिक रेडियो और आवेदन प्रक्रिया की जटिलता और निष्पक्षता भारत सरकार के सामाजिक सांस्कृतिक उन्नति कृषि संरक्षण, पर्यायवरण रक्षा आदि के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के शैक्षिक, विकासात्मक गतिविधियों के प्रसार-विस्तार के लिए सामुदायिक रेडियो के खोलने की मंशा को दिक्षाता है।इस प्रकार यह स्पष्ट दिखता है कि भारत में सामुदायिक रेडियो खोलने की प्रक्रिया जटिल और मूल्यपरक है।विज्ञापनों और वितिय सन्दर्भ में भी सरकार की नीतियां गैरलाभकारी और विकासपरक है।
2 सामुदायिक रेडियो की मूल्यों के संरक्षण में भूमिका निभा रहे है।
सामुदायिक रेडियो कार्यक्रमों के द्वारा मूल्यों का संरक्षण और स्थानीय संस्कृति परम्परा की धरोहर को सहेज रहा है।ढलती शाम को सलाम बुजुर्गो को समर्पित कार्यक्रम है तो नन्हों की दुनिया में बच्चों के लिए है।युवाओं और महिलाओं के रूचि के कार्यक्रमों के साथ साथसमुदाय की भागीदारी को महत्व दिया जाता है।यमय समय पर स्वास्थ्य शिविर और क्षमता निर्माण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।इसके कार्यक्रमों की प्रमुख विशेषता स्थानीय एंकरों और कलाकारों की सहभागिता है। सी.एम.एस के सामुदायिक रेडियो कार्यक्रमों की एंकरिंग में उस दिन से जुड़ी और रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी देना है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि सामुदायिक रेडियों कार्यक्रम मीडिया के अन्य प्रकारों की तुलना में मूल्यों के संरक्षण में श्रोताओं की भागीदारी कार्यक्रमों के निमार्ण और प्रसारण में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे है।
                                  संदर्भ ग्रन्थ सूची
1 ,2 जीवन मूल्यों के विकास में रेडियो की भूमिका सुबोध कुमार ल.ना.मि.वि.वि. ,दरभंगा
  Natinal saminar on Radio For Equitable Education To All organized by( DEP-SSA)At Madiangarhi IGNOU
3.सामुदायिक रेडियो एक परिचय- इन्दुप्रकाष श्रीमाली
4   शिक्षा तकनीकी-विजेन्द्र कुमार वशिष्ट 
 5-इलेक्ट्रानिक मिडिया एवं सूचना प्रौद्योगिकी-विजय कुमार आनन्द और राकेश नैम 
6-भारत में शिक्षा का विकास-डॉ शरदेन्दु किसलय डॉ गोविन्द प्रसाद 
  7-जनसंचार के सिद्वांत-जगदीश्वर चतुर्वेदी
8-भारत में किसानों को जागरूक बनाने में समुदायिक रेडियो की भूमिका- गोविन्द जी पाण्डेय एंव साधना श्रीवास्तव 132 -137 भारत में कृषि शिक्षा शोध एंव प्रसार डॉ सुनील गोयल , डॉ श्रीराम गोयल , डॉ जय प्रकाश राय ,डॉ राजेश कुमार गोयल , डॉ सतेन्द्र नाथ सिंह-पोद्वद्वार प्रकाशक वाराणसी
  9   9 Other Voices-The Struggle for Community Radio in India: K.   Kanchan Malik and Vinod
        Pavarala: Sage 2007
  10- Policy Guidelines for setting up Community Radio Stations in India, Ministry of     Information & Broadcasting, Govt. of India
11-COMMUNITY RADIO – A STIMULANT FOR ENHANCING DEVELOPMENT
THROUGH COMMUNICATION
By Ankita Chakraborty
Student of the Department of Mass Communication,University of Burdwan, West Bengal, India
12 Community Radio Celebrating a Decade Of People ‘S Voices Compendium 2013 Community Radio Stations
in India- Compiled and Edited byJayalakshmi Chittoor(Ministry of Information and Broadcasting Government of India and Commonwealth Educational Media)
Researched and Edited by one world.net(one world Foundation India)

13- Compendium 2012Community Radio Stations
in India- Compiled and Edited byJayalakshmi Chittoor(Ministry of Information and Broadcasting
Government of India and Commonwealth Educational Media
Centre for Asia (CEMCA), New Delhi)
वेब-साइट
http://www.digitallearning.in/articles/article-details.asp?articleid=1957&typ=COVER%20STORYजानकारी उपलब्ध कराने में सी एम एस टीम का सहयोग रहा।




भारत में गाँवों के विकास में मीडिया की भूमिका

                  भारत में गाँवों के विकास में मीडिया की भूमिका



असली भारत गाँवों में बसता है। भारत की जीवन शक्ति का आधार ग्रामीण समाज है। अतः गाँवों का विकास किये बिना देश का विकास संभव नहीं है। अभी भी देश की अधिकाश जनसंख्या गाँवों में ही निवास करती है। किन्तु गाँवों में रोजगार अवसरों का अभाव होने के कारण गाँव वाले गरीबी, बेरोजगारी व भूखमरी जैसी समस्याओं से त्रस्त है।
जब तक हम जनजातियों और पिछड़े वर्ग के लोगों का उत्थान करने में समर्थ नहीं तब तक भारत का भविष्य अंधकारमय रहेगा। इस उक्ति पर जरा गौर करते हैं। क्या सच में असली भारत गाँवों में बसता है, असली भारत क्या है? वह क्या चाहता है? उसकी बुनियादी जरूरते क्या है?  जब तक हम ग्रामीण भारत के विकास व विस्तार की योजनाओं पर ध्यान नहीं देंगे तब विजन 2020 का सपना साकार नहीं हो सकता है। संचार माध्यम इस कार्य को वखूबी निभा सकता है। मीडिया के अनेक रूप है। फिर चाहें वह प्रिंट हो या इलेक्ट्रानिक हो हर रूप में संचार माध्यम इस कार्य को वखूबी निभा रहे है। गाँवों और संचार माध्यमों के सम्बन्धों को समझने के पूर्व आवश्यक है कि हम संचार माध्यम को समझे ।
परम्परागत मीडिया -
भारत जैसे विकासशील देश में पम्रागत माध्यमों का अपना एक विशिष्ट महत्व व योगदान है। परम्परागत संचार माध्यम वे संचार माध्यम है। जिनमें समाज की परम्परा, संस्कृति और मूल्य समाहित हैं। यह पारम्परिक माध्यम ग्राम्य संस्कृति की देन है जिसकी मौलिकता तथा विश्वसनीयता अटूट है। यह ग्रामीण जनता के निकट होते हैं तथा इसके द्वारा ग्राम्य जीवन में व्याप्त बुराईयों को दूर किया जाता है। परम्परागत जनमाध्यम में दृश्य माध्यम के अन्तर्गत कठपुतली, नृत्य, मूर्ति, चित्र तथा स्थापत्य आते हैं। श्रव्य माध्यमों के अन्तर्गत लोकगीत, लोककथा तथा परम्परागत वाद्य यंत्र जैसे शंख, टोल, मंजीरा, बाँसुरी आदि आते हैं तथा परम्परागत दृश्य श्रव्य माध्यम के अन्तर्गत ध्वनि कठपुतली रास, रामलीला, स्वांग, रंगमंच, लोकनाट्य, जनमाध्यम के रूप में सफल भूमिका का निर्वाहन कर रहे हैं।
वर्तमान युग में भले ही नव-इलेक्ट्रानिक उपकरण आ गये हैं पर गाँवों में आज भी लोककला व परम्परागत माध्यम अस्तित्व में है।
भारत लोककला की दृष्टि से अत्यन्त समृद्ध राष्ट्र है। जनमानस पर त्वरित गति से इसके पड़ने वाले प्रभाव की व्याख्या करते हुए सन् 1972 की यूनेस्कों रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘‘पारस्परिक माध्यम व्यवहारिक परिवर्तन लाने और निचले स्तर पर विभिन्न समुदायों को समकालीन मुद्दों के प्रति जागरूक बनाने में जीवंत भूमिका निभाते हैं’’।
मुद्रित माध्यम या प्रिन्ट मीडिया-
विश्व में मुद्रण का आविष्कार एक क्रान्तिकारी घटना थी। मुद्रण का आविष्कार जर्मनी के गुटबर्ग ने 1956 में किया था। भारत में पहला प्रिटिंग प्रेस 1556 में गोवा में आया। संचार माध्यमों में सबसे व्यापक व आकर्षक माध्यम के रूप में इस माध्यम की गणना की जाती है यह माध्यम अधिक विश्वसनीय व प्राचीन है। उदाहरण दैनिक समाचार-पत्र, साप्ताहिक समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, हाउस जनरल, पुस्तकें, पम्पलेट इसके अन्तर्गत आते हैं।
समाचार-पत्र-
टी0आर0 श्रीनिवासन की पुस्तक ‘‘द प्रेस एण्ड द पब्लिक’’ के अनुसार आधुनिक युग के अनेक चमत्कार देखे जा सकते हैं। उन चमत्कारों में मेरी समझ में सबसे बड़ा चमत्कार आधुनिक समाचार पत्र हैं यह अपने आप एक चमत्कार ही नहीं वरन् अनेक चमत्कारों का जन्मदाता भी है। यह चीज को बनाता और बिगाड़ता है। यह राष्ट्र की ताकत का निर्माण कर सकता है या उसे खत्म कर सकता है। यह वह धूरी है जिनके चारो ओर समस्त संसार चक्कर लगाता है। इसने आधुनिक जीवन में केन्द्रीय स्थिति प्राप्त कर ली है। आज निश्चित रूप से समाचार पत्र का युग है तथा तात्कालिक भविष्य भी इससे अलग नहीं दिखाई देता है।
समाचार-पत्र जनमत की अभिव्यक्ति का सशक्त एवं लोकप्रिय साधन है। यह लोक शिक्षा व लोक जागृति का सशक्त साधन है।
समाचार-पत्र का विकास-
जनमाध्यम के रूप में समाचार-पत्र काफी उपयोगी है। समाज के कोने कोने की खबर व उसका विश्लेषण समाचार-पत्र के माध्यम से मिलता है। समाचार-पत्र के कम्युनिकेशन पैकेज में समाचार विचार सूचना तथा विज्ञापन सब होता है।
भारत में ब्रिटिश काल में समाचार-पत्र छपना आरम्भ हुआ। पहला समाचार-पत्र सन् 1780 ई0 में बंगाल गजट आफ कलकŸा जनरल एडवरटाइजर निकला जिसके सम्पादक जेम्स आगस्ट हिक्की थे। सन् 1826  ई0 में हिन्दी का पहला दैनिक पत्र उर्दन्त मार्तण्ड निकला। इन समाचार पत्रों का देश की आजादी के संघर्ष में अमूल्य योगदान रहा जनमाध्यम के रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन को गति दी तथा पत्र जन चेतना व जागरूकता फैलाने का हथियार बन गये, परन्तु स्वतंत्रता पश्चात् समाचार-पत्रों का उद्देश्य बदला। समाचार-पत्रों का व्यवसायिक स्वरूप हो गया। जिन पत्रों का लक्ष्य सूचना देना, ज्ञान वृद्धि करना, मनोरंजन करना था। जिन पत्रों का लक्ष्य सूचना देना, ज्ञान वृद्धि करना, मनोरंजन करना था। उन पर अब विज्ञापनदाताओं, राजनीति व बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का दबाव पड़ने लगा। नये माध्यमों के प्रवेश व नयी तकनीकों के प्रयोग ने पत्रों की प्रणाली व नीतियों पर अनेक परिवर्तन किये। इन्टरनेट व फोटो पत्रकारिता की माँग बढ़ी। इलेक्ट्रानिक समाचार-पत्र भी आये।
पत्रिका-
जनमाध्यम के रूप में पत्रिकाओं की अहम भूमिका है। विभिन्न
पत्रिका-
जनमाध्यम के रूप में पत्रिकाओं की अहम भूमिका है। विभिन्न
विषयों जैसे समाचार आधारित (फ्रंट लाइन, इण्डिया टुडे, आउठ लुक) खेल पर आधारित क्रिकेट सम्राट, स्पोर्ट्स लाइन, बिजनेस, शैक्षणिक प्रतियोगी, बाल, महिला, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक अनेक पत्रिकायें आ रही है। यह पत्रिकायें अनेक अवधि वाली होती है। जैसे दैनिक साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक अर्द्धवार्षिक, वर्षिक, विशेषांक आदि। हर पत्रिका का अपना पाठक वर्ग होता है।
पत्रिकाओं में विज्ञापन हेतु पृष्ठों के हिसाब से स्थान खरीदा जाता है। रंगी विज्ञापन का मूल्य अधिक होता है। इसमें कई सारी स्थायी स्तम्भ समसामयिक लेख तथा मनोरंजन सामग्री होती है। घटना की गहराई व पुष्ट प्रमाणों की सहायता से कथा तैयार करता है। पत्रिका में अधिकतर साहित्यिक व आकर्षक भाषा शैली का प्रयोग किया जाता है।
बौद्धिक वर्ग आज भी समाचारों के विश्लेषण व रिकार्ड रखने हेतु पत्रिका को उपयोगी जनमाध्यम मानते हैं।
इलेक्ट्रानिक मीडिया
रेडियो इलेक्ट्रानिक जनमाध्यम की श्रेणी में आता है। इस जनमाध्यम को श्रव्य समाचार पत्र कह सकते हैं। यह कानों का विस्तार है। सुन्दर दुर्गम स्थानों तक इसकी पहुंच है। भारत में रेडियो की शुरूआत विधिवत् ढंग से 1927 में हुयी रेडियो सस्ते दामों में मिल जाता है। यह एक जनमाध्यम के रूप में निष्पक्ष भूमिका का निर्वाहन कर रहा है। यह सस्ते दामों में उपलब्ध होता है। रेडिया का प्रसारण गाँवों और देश के दूर इलाकों में विभिन्न भाषाओं और बोली में कार्यक्रम प्रसारित करता है। इसे यात्रा के वक्त या अन्य कार्य करते हुए भी सुन सकते हैं। बिजली रहे या नहीं यह बैटरी से चल सकता है। नेत्रहीनों के मनोरंजन का तो एकमात्र सहारा है रेडियो अनपढ़, पढे़-लिखे, अमीर-गरीब सभी के समान है। जनमाध्यम के रूप में रेडिया भारतीय संस्कृति की रक्षा कर रहा है। यह एक लोकप्रिय जनमाध्यम है।
टेलीविजन-
सन् 1926 में 27 जनवरी को जॉन  बेयर्ड ने टेलीविजन का आविष्कार कर जनमाध्यमों की दुनिया में क्रान्ति ला दी। अगर रेडियो का आविष्कार एक चमत्कार था तो जनमाध्यम के रूप में टेलीविजन का आविष्कार एक आश्चर्य था। रेडियो को केवल सुना जा सकता था, जबकि टेलीविजन को देखा और सुना दोनों जा सकता था।भारत में इसका आगमन 1959 को हुआ।
टेलीविजन आधुनिक जीवन शैली का अनिवार्य व अभिन्न अंग बन गया है। वर्तमान में टेलीविजन हर घर का हिस्सा है। जनमाध्यम के साधन के रूप में टेलीविजन को ज्ञान व सूचना प्राप्ति के साथ-साथ मनोरंजन का साधन समझा जाता है। टेलीविजन ने दूरस्थ क्षेत्रों में ना सिर्फ घुसपैठ की वरन् सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में हलचल मचा कर रखी दी। टेलीविजन श्रव्य-दृश्य माध्यम है और ही सीखते है और फिर अपने व्यवहार में लाते हैं। लेकिन वर्तमान में मनोरंजन का यह माध्यम समाज के लिए चुनौती कर उभर रहा है।
भारत में सामुदायिक रेडियों का विकास-
1923-24 से रेडियो क्लब के रूप में और 1927 से भारत में रेडियो भारतीय जनमानस को शिक्षा, सूचना, मनोरंजन देने का कार्य कर रहा है।
सामुदायिक रेडियों के चलन का अभियान 1990 के दशक से शुरू हुआ। वर्ष-1991 के आसपास जैसे ही उदारीकरण के नाम पर बाजार खुला देश में कई माध्यमों की अवधारणाओं का अंकुर फूट पड़ा, यह वह दौर था, जब प्रिन्ट, इलेक्ट्रानिक मीडिया और गॉव तक पहुँच रहे थे। इन माध्यमों को प्रभावी बनाने के साथ-साथ बाजार में खड़ा करने की पुरजोर कोशिशों के बीच ही सामुदायिक रेडियों की अवधारणा पनपी।’
यद्यपि इससे पूर्व कुछ प्रयास किये गये, जो कि समुदायिक ‘‘मीडिया की भावना का पुरजोर प्रतिनिधित्व करते थे। 1980 के दशक में मैकब्राइड कमीशन की रिपोर्ट में यह सुझाव था कि स्थानीय स्तरों पर मीडिया को काम करना होगा। परन्तु वर्तमान में सामुदायिक रेडियों का जो स्वरूप है, उसकी नींव वर्ष 1995 में पड़ी थी।
‘‘वर्ष 1995 में उच्चतम् न्यायालय के न्यायाधीश पी0बी0 सावंत ने एक अहम् फैसले में कहा था कि रेडियों पर कोई एकाधिकार नहीं हो सकता और हवाई तरंगों पर सबका अधिकार है। न्यायमूर्ति ने अपने फैसले में साफ लिखा था कि हवाई तरंगे सार्वजनिक सम्पत्ति के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है ओर इनका उपयोग आम लोगों को शिक्षित करने और उनका जनमत विकसित करने में किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को हमारे संविधान में दी गई वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही अंग माना गया।’’
इस फैसले के बाद देश में सामुदायिक रेडियों स्टेशन स्थापित करने की दिशा में कुछ महत्वपूर्ण प्रयास हुए और पहली बार लोगों ने जाना कि सरकारी रेडियों नेटवर्क के अलावा भी अपने अलग रेडियों स्थापित किये जा सकते हैं।दिसम्बर, 2002 से भारत सरकार ने सामुदायिक रेडियो के लिए लाइसेंस शैक्षणिक संस्थानों देना स्वीकारा।
देश का पहला कैम्पस रेडियो 2004 को चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय में खोला गया। इसका संचालन एजुकेशन एण्ड मल्टीमीडिया रिसर्च सेन्टर करता है । सारे कार्यक्रमों का निर्माण अन्ना विश्वविद्यालय के मीडिया विज्ञान के विद्यार्थियों द्वारा किया जाता है।
गैर सरकारी संगठन और नागरिक समाज निकायों की लम्बी लड़ाई के बाद 6 नवम्बर, 2006 को सूचना और प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार ने सामुदायिक रेडियो स्टेशन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।
‘‘सामुदायिक रेडियो वह माध्यम है, जहॉ किसी समुदाय विशेष की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक निश्चित भू-भाग के अन्दर रेडियों कार्यक्रमों का प्रसारण करना होता है और प्रसारित कार्यक्रमों में उस समुदाय की सक्रिय सहभागिता होना आवश्यक  है यानि समुदाय के लिए समुदाय के द्वारा समुदाय का प्रसारण।सम्पूर्ण मीडिया को समझने के साथ ही इन मीडिया में कार्यक्रमों की गुणवŸा व मुख्यधारा की सोच का  प्रभाव भी पड़ता है। अतः यदि मीडिया के कर्ता-धर्ता वास्तविक विकास और अपने कार्यो को निष्ठापूर्वक करेंगे तब भारत के गाँवों का वास्तविक विकास सही मायनों में होगा। बस आवश्यकता सही सोच के साथ जनता के वास्तविक हितों के अनुरूप कार्यक्रम बनाने की आवश्यकता है। ।
                                                            डॉ  साधना श्रीवास्तव

Thursday, April 27, 2017

महिला सशक्तिकरण में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल लखनऊ के सामुदायिक रेडियो की भूमिका का विश्लेषण

 महिला सशक्तिकरण में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल लखनऊ के सामुदायिक रेडियो की भूमिका का विश्लेषण

वर्तमान में महिलाएं हर क्षेत्र में परचम लहरा रही है। चाहे वह ऑफिस, चिकित्सा, बैकिंग, मीडिया आदि सभी क्षेत्र महिलाओं के प्रभुत्व से अछूते नहीं है। जिससे उनकी भूमिका में बढ़ोत्तरी हो रही है।
महिलाओं के विकास के बिना किसी भी राष्ट्र का विकास संभव नहीं है। इसी दिशा में भारत में महिलाओं की स्थिति आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से सुधार हेतु सरकार की विभिन्न योजनाओं को चला रही है। महिलाएँ परिवार, समाज एवं सुदृढ़ राष्ट्र की रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।  महिला मानव परिवार, सभ्यता एवं संस्कृति का आधार स्तम्भ है।
इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान में महिलाओं के उत्थान के लिए शिक्षा एवं रोजगार से सम्बन्धित समान अवसर, समाज आजीविका, समान कार्य के समान भुगतान के अधिकार दिए गए हैं। इस प्रकार महिलाओं को विकास की मुख्य धारा से जोड़े बिना किसी समाज, राज्य एवं देश के आर्थिक सामाजिक और राजनैतिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है।
महिला सशक्तिकरण भारत में महिलाओं की स्थिति आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से काफी सुधार आया है। स्त्री शिक्षा हेतु सरकार की विभिन्न योजनाओं ने स्त्री साक्षरता में वृद्धि की है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति -जनजाति हेतु आरक्षण की व्यवस्था, चिकित्सा, बैकिंग, मीडिया आदि सभी क्षेत्र महिलाओं के प्रभुत्व से अछूते नहीं है। ऐसे में मीडिया का भूमिका अहम हो जाती है यह शोधपत्र यही जानने का प्रयास है कि सी0एम0एस0 सामुदायिक रेडियो महिलाओं के विकास में क्या योगदान दे रहा है ? महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए क्या और कैसे कार्यक्रम बना रहा है

भारत में सामुदायिक रेडियो का आगमन -1995 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश के निर्णय कि वायु तरंगे सार्वजनिक है के बाद 18 दिसम्बर 2002 को भारत सरकार द्वारा भारत में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को स्थापित करने हेतु नीतिगत दिशा निर्देश को पारित किया था। यह दिशा-निर्देश सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने के इच्छुक व्यक्तियों के एक स्पष्ट रुप से मार्गदर्शिका है।
वर्ष 2002 में भारत सरकार ने देश में सिर्फ शैक्षणिक संस्थाओं जैसे कि आई0टी0आई, आई.आई.एम., सुस्थापित शैक्षणिक संस्थाओं, स्कूल विश्वविद्यालय आदि को सामुदायिक रेडियो स्टेशन चलाने के लाइसेंस देना प्रारम्भ किया।
सामुदायिक रेडियो अपने कार्यक्रमों के प्रसारण के माध्यम से समुदाय के सदस्यों को शामिल कर उनकी समस्या सुनता, चर्चा करता और समाधान प्रस्तुत करता है। यह कोई वाणिज्यिक या पैसों का लाभ करने के लिए नहीं बल्कि सामुदायिक हितों को प्रेरित करने वाली प्रसारण सेवा है।
   सारी बातों से यह स्पष्ट हो जाता है कि सामुदायिक रेडियो का उद्देश्य समुदाय के सदस्यों को शामिल कर समुदाय की सेवा करना है। सामुदायिक रेडियो का फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, ग्रामीण कृषि और सामुदायिक विकास से संबंधित मुद्दों पर ध्यान में रखकर सांस्कृतिक और स्थानीय मुद्दों और विषयों पर प्रस्तुति और प्रतिबिंबित करने पर रहता है। यह स्थानीय भाषा में ही स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है।
   सी0एम0एस0 सामुदायिक रेडियो के कार्यक्रम और कवरेज क्षेत्र-
सिटी मोन्टेसरी स्कूल लखनऊ का एक निजी स्कूल हैं। इसकी स्थापना 1959 को डॉ भारती गॉधी और डॉ जगदीश गॉधी ने की थी । यह प्रारम्भिक दौर में प्रेरणादायक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण करता था। सी0 एम0 एस0 सामुदायिक रेड़ियो गैर लाभकारी रेडियो है। यह शहरी और विशेष कर गरीब ग्रामीण समुदाय के प्रति प्रतिबद्व है। यह किसी प्रकार के विज्ञापन नहीं लेता है। यह गोमती नगर 90.4 मेगाहर्टस और ब्डै एल.डी.ए. कानपुर रोड 90.4 मेगाहर्टस की फ्रिकेवेन्सी पर चला रहा है। सिटी मांटेसरी स्कूल के सामुदायिक रेडियो चैनल गोमती नगर और सी0एम0एस0 डिग्री कॉलेज के सामुदायिक रेडियो जुलाई 2005 में केन्द्रीय मानव संसाधन अर्जुन िंसंह ने उद्घाटन किया। जयपाल रेड्डी सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे। डा0 जगदीश गाँधी चेयरमैन और मिसेज डा0 भारती गाँधी सी0एम0एस0 की प्रसीडेंट है। यह एक ऐसा प्रयास था जिसने बिना पढ़ी-लिखी और गरीब बच्चों और श्रोताओं को लाभ पहुँचाने की पहल की गयी थी।
वर्ष 2005 में इसको शैक्षणिक रेडियो के लिए लाइसेंस मिला इस दौरान सेलेबस, शैक्षणिक गतिविधियाँ व विषय से सम्बन्धित कार्यक्रम प्रसारित किये जाते रहे जिसमें शिक्षण व छात्र दोनों भाग लेते।
2008 में दिल्ली में एक मीटिंग बुलाकर सरकार में निर्देश किये कि ब्डै को सिर्फ शैक्षाणिक नहीं विकास से जुड़े कार्यक्रम बनाये चहिए। इसके बाद से ही समुदाय की लड़कियों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और महिला सशक्तिकरण का माध्यम बनकर सिटी मॉन्टेसरी स्कूल का सामुदायिक रेडियो ने सफलता के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किये है।
ग्रामीण विकास व लोकहित के लिए ब्डै ने 6 गाँव के विकास के प्रयास किया। यह गोमती नगर ब्रांच के गाँव मल्हौर, मकदूमपुर,खड़गापुर, और एल.डी.ए. ब्रांच के गाँव झिलझिलापुरवा, गिन्दन खेड़ा, ललईखेड़ा व उसी के पास स्थित सपेरा बस्ती है। इसके साथ ही निजामपुर, मल्हौर, लोनापुर, पखद्मपुर नगर, वीराखेड़ा, ललई खेड़ा अशरफ नगर, नवाबपुर, डिगडिगा, ग्वारीपुरवा, खडगपुर, नूरपूर, अर्जुनगंज, गोमती नगर, तेलीबाग, आलमबाग, एल0डी0ए0, रजनीखंड, उत्तेरेढ़िय, बंगला बाजार, मकइमपुर, अरशफ, नगर, खडगपुर, लोनापुर और अशियाना आदि कवरेज जोन में 10-12 किलोमीटर रेडियस के 20 लाख जनता आती है।
 जिसमें स्थानीय लोगों की सहभागिता रहती है। हेड आफिस से सामुदायिक रेडियो कार्यक्रमों के प्रमुख वर्गीस कुरियन और आर. के. सिंह है। हर्ष बावा, सोमा घोष, वनिता शर्मा, रविन्द्र त्रिपाठी, मदन के साथ स्थानीय समुदाय के अनेक एंकर और सदस्यों की सहभागिता से कार्यक्रमों का निर्माण किया जाता है। 90ण्4 मेंगाहर्ट्ज पर इसके कार्यक्रमों की शुरूआत प्रतिदिन स्ांकेत ध्वनि से रेडियो प्रसारण की शुरूआत होता है। कुछ कार्यक्रमों का प्रसारण प्रतिदिन होता है। जिनमें अर्चना भक्ति गीतों का कार्यक्रम है, जिसमें सर्वधर्म समभाव के आधार पर पॉच भक्ति गीत बजते है। बात पते की में उस दिन से जुड़ी रोचक और खास जानकारी देते है। विशेष तौर पर सोमा घोष और वनिता शर्मा महिला सशक्तिकरण को समर्पित अनेक कार्यक्रमों का निर्माण सामुदाय की महिलाओं के साथ मिल कर उन्ही के लिए करती है। इसके साथ ही अनेक ऐसे नाम है जो समुदाय के लिए प्रेरणास्त्रोत बने है।
    नन्हों की दुनिया बच्चों का कार्यक्रम जिसमें कविता, कहानी और एक रोचक सरप्राइज प्रस्तुती के अंतगर्त ज्ञानवर्द्वक और मजेदार तरीके से बच्चों में मूल्यों का सृजन किया जाता है। कम्यूनिटी गतिविधियां समुदाय की रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर आधरित कार्यक्रम है। गीतों की झंकार समुदाय की पसंद के गीत समुदाय के कलाकारों द्वारा सुनाये जाते हैं। जनहित में जारी-यह लाईन फोन इन कार्यक्रम विशेषज्ञों के माध्यम से सरकारी एवं गैर सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी अपने श्रोताओं तक पहुचाता है। इस कार्यक्रम में कम्यूनिटी श्रोता फोन के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर लाभ उठाते हैं।
नारी शक्ति महिला सशक्तिकरण से सम्बन्धित कार्यक्रम है तो ज्ञान अनुभव की बातें प्रेरणादायक है इसमें सी0एम0एस के संस्थापक और प्रबंधक डा0जगदीश गांधी और निदेशिका डा0 भारती गांधी प्रेरक और अनुभवप्रद सीख के साथ अनुभव ज्ञान की बाते बताते है। प्रेरणादायक गीत में प्रेरणादायक गीत  प्रेरणा देते गीत सुनाये जाते है।
अंग्रेजी की पाठशाला में इसमें अंग्रेजी भाषा की जानकारी रोचक तरह से दी जाती है। एक मुलाकात में समुदाय के विशेष लोगों से मुलाकात करवायी जाती है।
हम होगें कामयाब लघु में कुटीर उद्योगों की जानकारी दी जाती है।
योग और हम लाइव फोन इन कार्यक्रम है जिसमें योग विशेषज्ञ के माध्यम से लोगों
को योग के प्रति जागरूकता एवं उससे होने वाले शारीरिक एवं मानसिक लाभों से
अवगत कराता है। इसमें श्रोता फोन के माध्यम से किसी भी विकार को योग से
कैसे दूर किया जाता है इसकी जानकारी प्राप्त करता है।
रंग मंच कार्यक्रम में कम्यूनिटी सदस्यों के माध्यम से नाटकों में, विभिन्न किरदारों के माध्यम से, जीवन सम्बन्धी मूल्यों को समझाया जाता है।
     सरगम शास्त्रीय संगीत पर आधरित कार्यक्रम है। मन की बात आपके साथ परिचर्चा का कार्यक्रम है। एक अनोखी उड़ान में समुदाय के विशेष लोगों से मिलवाया जाता है। ज्ञान दर्पण जानकारी आधरित कार्यक्रम है।
 अनमोल रतन कार्यक्रम में शहर की महिलाओं की उत्थान एवं विकास की
कहानी उनसे की गई बातचीत के माध्यम से श्रोताओं तक पहुंचाई जाती है। जो
क्षेत्र के लिए प्रेरणास्त्रोत का काम करता है।
 माटी के गीत लोकगीतों का लाइव फोन इन कार्यक्रम है जिसमें समुदाय के लोगों को लोकगीतों को सुनने और सुनाने का अवसर मिलता है। हमारी रसोई कार्यक्रम में कम्युनिटी सदस्यों द्वारा व्यंजन बनाने के तरीके श्रोताओं तक पहुंचाये जाते हैं।
युवा मंच कार्यक्रम कम्यूनिटी के युवाओं के माध्यम से सम-सामयिक विषयों
पर परिचर्चाएं करवाता है और स्थानीय युवाओं में प्रेरणा एवं जागरूकता लाने का प्रयास किया जाता है। ढलती शाम को सलाम कार्यक्रम समाज के वरिष्ठजनों को समर्पित है। जिसमें बुजुर्गों द्वारा जीवन मूल्यों एवं अनुभवों से जुड़ी हुई उनकी अपनीही कहानी उन्हीं की जुबानी श्रोताओं तक पहुंचाई जाती है। हम और हमारे कानून लाइव फोन इन कार्यक्रम है जिसमें श्रोताओं को कानूनी सलाह दी जाती है।
सेहत की बात डॉक्टर के साथ जो कि लाइव फोन इन कार्यक्रम है । इसमें डाक्टरों के
माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श दिया जाता है।
अम्मा की बातें  कार्यक्रम में वरिष्ठ ग्रामीण महिलाओं द्वारा अनुभव और जीवन सम्बन्धी व्यवहारिक बातों का आदान-प्रदान किया जाता था।
साथी हाथ बढ़ाना नामक कार्यक्रम के माध्यम से नित्य नये-नये विषयों से, श्रोताओ को सामाजिक कुरूतियों, अंधविश्वास एवं रोगों सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने का प्रयास था। सामुदायिक रेडियो का फोकस सामुदायिक रेडियो सेवा पर कार्यक्रमों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, ग्रामीण कृषि और समुदायिक विकास से संबंधित मुद्दों पर ध्यान रखकर सांस्कृतिक और स्थानीय मुद्दों और स्वरूप, विषय, प्रस्तुति और प्रतिबिंबित करने पर रहता है। यह स्थानीय भाषा में ही स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। कृषि गतिविधियाँ व विषय से सम्बन्धित कार्यक्रम प्रसारित किये जाते रहे जिससे स्थानीय किसान व दोनों भाग लेकर जुड़े और कार्यक्रम बनाये चहिए। इसमें कम्युनिटी सदस्य भी सहभागिता करते थे। जमाना बदल गया कार्यक्रम  मैग्जीन विधा पर आधरित बेटियों और महिलाओं की समस्याओ का समाधान खोजता कार्यक्रम है।
महिला सशक्तिकरण व महिलाओं के विकास के विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य, कृषि, खेती, रहन-सहन, संगीत पर आधारित होते हैं। महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों के बारे में उन्होंने बताया कि सामुदायिक शोध के दौरान हमने पाया कि महिलाएँ घर में रहती हैं। वह पारिवारिक निर्णयों में कुछ बोल नहीं पाती अतः सामुदायिक रेडियो को महिलाओं के विकास, सशक्तिकरण के बारे में कुछ कार्यक्रम बनाने और प्रसारित करने चाहिए। यह कार्यक्रम उनसे इंटरव्यू, परिवार व्यवहार और यह जिस समस्या से जूझ रही है उन पर चर्चा करनी चाहिए। समाधान देना चाहिए और वकीलों से कानूनी सलाह पर आधारित कार्यक्रम भी बनाते हैं इसी प्रयासों महिलाओं में स्वास्थ्य के साथ-साथ अन्य बातों की जागरूकता आयी है।
इस प्रकार यह कह सकते है कि महिलाओं के द्वारा कार्यक्रम निर्माण और संचालन में समुदाय की महिलाओं के साथ मिल कर उन्ही के लिए प्रसारण भी करती है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सी0 एम0 एस0 सामुदायिक रेड़ियो स्टेशन से अनेक ऐसे नाम है जो समुदाय के लिए प्रेरणास्त्रोत बने है।
छेनावती  20 वर्षीय छेनावती स्टुडियों मे मार्च 2009 को आयी थी। उसने एक भजन सुना था। उसने पहले एक भजन सुनाया फिर धीरे-धीरे अन्य रेडियो कार्यक्रमों मे भागीदारी की । एंकरिंग और कम्प्यूटर वर्क सीख। समय के साथ वह लाइव फोन इन कार्यक्रम और रिर्काडेड सभी प्रकार के कार्यक्रमों मे भागीदारी लेने लगी। छेनावती एक सक्रिय श्रोता के साथ वलेन्टियर भी है। वह गॉव महिलाओं को लोकगीत गाने के लिए प्रेरित करती है।छेनावती के ब्यक्तित्व विकास में सी0 एम0 एस0 सामुदायिक रेड़ियो का बहुत योगदान है। वह मानती है कि पहले उसे किसी अजनबी से बात करने में संकोच लगता था। एक झिझक होती, लेकिन जब से उसे अवसर मिला एक मंच मिला उसका व्यक्तित्व बदल गया।
शिवानी अग्रवाल- 20 वर्षीय पोलियों की बीमारी से जूझती शिवानी फोन इन कार्यक्रमों मे सक्रिय भागदारी करती थी। समय के साथ उसने सामुदायिक रेडियो स्टेशन आना शुरू किया। एंकरिंग, एडिटिंग तथा कम्पयूटर का काम सीखा। शिवानी का कहना है कि पहले वह सबसे बात करने में भी डरती थी लेकिन जब से सामुदायिक रेडियो स्टेशन से जुड़ी उकी सारी झिझक दूर हो गयी ।अब वह माइक पर बोल सकती और उनके भजन और कविता नियमित रूप मे बजने से उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है।
नन्दनी- नन्दनी स्नातक की छात्रा है रेडियो स्टेशन मे जोड़ा वर्तामान में ना सिर्फ वह कुशलता से एंकरिंग कर रही है बल्कि दो बार दिल्ली जाकर वर्कशाप मे भागीदारी की है। अपी प्रतिभा के बल पर उसने मिसाल कायम की जनवरी 2014 मे महिला कार्यशाला में वह ट्रेनर बनी उसने अन्य महिलाओं ट्रेनिंग दी । पया, शालिनी, मालती, श्रुति अनेक  स्थानीय समुदाय के सदस्य है जो सक्रियता से सामुदायिक रेडियो स्टेशन के इन डोर और आउटडोर सभी कार्यक्रमों में भाग लेते है।
राम श्री गुप्ता- महिला सशिक्तकरण का सशक्त उदाहरण है। वह समुदाय की ऐसी सदस्य है जो स्वयं तो पढ़ ही रही है साथ ट्यूशन पढ़ा समुदाय के बच्चों में शिक्षा का उजाला फैला रही है। सिविल सेवा की तैयारी कर रही राम श्री 2009 से सी0 एम0 एस0 सामुदायिक रेड़ियो स्टेशन से जुड़ी है। वह दिल्ली मे विज्ञान में सी0 एम0 एस0 की प्रतिनिधि के रूप में गयी थी। अपना देश और नियमित एंकरिग के साथ अन्य मीटिंग और गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करती है। राम श्री में जो आत्मविश्वास और कार्य के प्रति लगन हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।
सरिता -21 वर्षीय सरिता रावत गॉव जिलाजिला पुरवा की निवासी है। जिसमे अपना स्नातक पूरा कर लिया है। उसके पिता को पैरालिसिस का अटैक  आने के कारण उनका स्वास्थ्य इतना बिगड़ चुका है कि वह पारिवारिक दायित्वों मे पूर्ति में असक्षम है।सरिता का स्वास्थ्य भी खराब रहता था। एक बार उसके सी0 एम0 एस0 रेड़ियों स्टेशन के’’ सेहत की बात डाक्टर के साथ’’ में कॉल किया जो प्रत्येक रविवार आता है और अपनी व्यक्गित  स्वास्थ्य  समस्या बतायी दूसरी तरफ  फोन पर डा0 अमिता पाण्डेय थी। सरिता फोन पर अपनी बीमारी जो कि एनीमिया थी से जुड़े व्यक्तिगत सवालों के जवाब देने में संकोच कर रही थी डा0 अमिता ने उन्हे अस्पताल आने की सलाह दी जिसमे सरिता असक्षम थी। उस वक्त सरिता के मदद के लिए सी0 एम0 एस0 की टीम ने महिला एंन्कर भेजी जो कि सरिता को अस्पताल तक ले गयी।सरिता की अस्पताल की फीस और दवाईयों का खर्च पूरा सी0 एम0 एस0 सामुदायिक रेड़ियो ने वहन किया। इलाज के बाद जल्दी ही सरिता को स्वास्थ्य लाभ हुआ। इसी दोरान सरिता के दिल में छुपे सपनों का जानने का मौका सी0 एम0 एस0 टीम को मिला ।सरिता अच्छे लोकगीत गाती है दूसरों की बातों को गहराई से समझती है उसके दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी।ऐसे में वह अपने गॉव के लिए बहुत कुछ करना चाहती थी। बस फिर क्या था सरिता एंकर के रूप मे रेड़ियो से जुड गयी। उसे सी0 एम0 एस0 रेडियोस्टेशन मे ट्रेनिंग दी गयी। उसने हरी सब्जियॉ खाना शुरू किया साथ ही वह गॉव की अन्य लड़कियॉ के लिए प्रेरणा स़्त्रोत बन गयी। वर्तमान मे सरिता एक कुशल एंकर है। उसने “साथी हाथ बढ़ाना’’ नामक कार्यक्रम में एंकरिग की है ।साथी हाथ बढ़ाना कार्यक्रम विभिन्न ग्रामीण समस्यों और साफ-सफाई के साथ-साथ पानी बचाओं स्वच्छता आदि में जुड़े सामाजिक और स्थानीय समुदाय के मुद्दों से जुड़ी श्र्ृंखला थी।इसी कार्यक्रम को थिमेटिक कैटेगरी का राष्ट्रीय पुरूस्कार 18 फरवरी 2012 को नई दिल्ली के राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो सम्मेलन में मिला। सरिता का कहना है कि ’’मै हमेशा से कुछ अलग करना चाहती थी लेकिन गॉव में इतने साधन नहीं है।मेरे पास हजारों सपने थे लेकिन पूरा करने का जरिया नही था। मै अपने गॉव के लिए बहुत कुछ करना चाहती थी कुछ कर नही पाती। जबसे सी0 एम0 एस0 सामुदायिक रेड़ियो स्टेशन से जुड़ी हुँ तब से गॉव के लोगो तक अपनी बात पहुँचा पा रही और उन्हे संवेदनशील मुद्दो के प्रति जागरूक भी कर पर रही हूँ। ऐसी अनेक शहरी व ग्रामीण महिलाओं के विकास के लिए समय-समय पर कार्यशलाओं का भी आययोजन करवाता है और अलग से भी रेडियो के माध्यम से प्रोग्राम चलाये जाते हैं। इससे महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार के समस्याओं के समाधान के लिए अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जा रहे है। महिलाओं के विकास के लिए शहरी व ग्रामीण महिलाओं के लिए अलग से भी सामुदायिक रेडियो के माध्यम से प्रोग्राम चलाये जाते हैं। इससे महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार के समस्याओं के समाधान के लिए अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा सकता है।
निष्कर्ष एवं सुझाव-

अध्ययन के उपरान्त निष्कर्ष रूप में कह सकते है सी0एम0एस0 सामुदायिक रेडियो की संकल्पना ने महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभायी है। जो कि अग्रलिखित है।
महिला साक्षरता पर विशेष ध्यान देकर।
रेडियो के कार्यक्रमों के माध्यमों से अंधविश्वास व रूढ़िगत बातों को दूर किया।
विभिन्न आयु समूह की महिलाओं की शिक्षा और व्यवसाय शिल्प, प्रशिक्षण, स्वरोजगार, व्यवसाय  कार्यक्रम प्रसारित किये ।
महिलाओं को कानूनी सलाह सम्बन्धी कार्यक्रमों का निर्माण किया।
महिलाओं के मनोरंजन हेतु उनकी रूचि के अनुरूपक कार्यक्रम बनाकर ।
महिलाओं को बचत व लोन और वित्तिय स्कीमों की जानकारी देकर।
पारिवारिक और ऐसी व्यक्तिगत समस्याओं के लिए ऐसे कार्यक्रमों का निर्माण किया जाये कि महिलाए अपनी समस्याओं का समाधान खोजा।
सामुदायिक रेडियों में ऐसे कार्यक्रम प्रसारित किये जाये जिनके माध्यम से वह अपनी लोक कला, परंपरा व हुनर से धन कमाने के  नुस्खे सीखे।
स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के कार्यक्रम बनाये।
महिला-कैरियर सम्बन्धी कार्यक्रमों का निर्माण किया।
भारत की अधिकांश जनसंख्या अभी तक गांवों में रह रही है। इनकी विविध भाषा तथा संस्कृति हैं। इनको राष्ट्र की मुख्य जीवनधारा से जोड़कर ही हम समग्र भारत के विकास का स्वप्न साकार कर सकते हैं। इस सपने को सामुदायिक रेडियो पूरा कर सकता है।
    संदर्भ ग्रन्थ सूची
जुलाई-सितम्बर, 2004 विदुर, पेज नं0-38 पर संजीव भनावत और क्षिप्रा माथुर।
 संचार श्री ‘‘शोध-पत्रिका’’, अक्टूबर से दिसम्बर, 07
इलेक्ट्रानिक मीडिया-डॉ0
साईमा सैयद जमिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली का शोध पत्र
दृश्य एवं जनसंचार माध्यम - कृष्ण कुमार रट्ट
  सामुदायिक रेडियों हैण्डबुक - सोसाइटी फॉर मीडिया एण्ड सोशल डेवलपमेन्ट वाराणसी, 2008
कु़रूक्षेत्ऱ सितम्बर 2005
कु़रूक्षेत्ऱ सितम्बर 2006