Tuesday, October 17, 2017

सूचनाएं है गुप्त

              सूचनाएं है गुप्त
मन चिंततित
चाहता है सब बहुत कुछ करना
फिर भी मन है व्यथित
यह कैसा तंत्र है
 स्ब ओर उथल पुथल
मन व्याकुल, आतुर
क्या ऐसे ही विकास होगा राष्ट्र का
क्या ऐसे ही मिल सकेगे अधिकार
ऐसे तो कुछ भी ना होगा
समझना होगा, सोचना होगा
निकालना होगा समाधान
तब ही कुछ रास्ते निकलेंगे
यू जब तक हम काटते रहेगें
रास्ते दूसरों के खुद भी गढ़्ढे में गिरते रहेगें।

 डॉसाधना श्रीवास्तव

यह हमारी लाइफ है

                  यह हमारी लाइफ है

जैसे-जैसे ट्रेन कानपुर स्टेशन छोड़ रही थी, वैसे-वैसे सपना को मंजिल करीब नजर आ रही थी। उसकी आँखों मंे हजारों सपने एक बार फिर झिलमिला उठे। 
सपना ने इंटर की परीक्षा पास की हैं। यू0पी0 बोर्ड से उसने जिला टाॅप किया था। आंखों में हजारों सपने लिये सपना ने शहर के सबसे बड़े कालेज में कृषि विज्ञान से स्नातक के लिए एप्लाई किया था।
दृश्य-1
 सपना जब हास्टल पहुची तो उसकी  रूममेट महक ने उसका स्वागत किया। 
महक ने सपना स्वागत है तुम्हारा इस नयी जिन्दगी में
सपना- स्वागत का बहुत धन्यवाद महक
आचनक हास्टल के एक रूम से बहुत लड़कियों के बात करने की और हल्के म्यूजिक के शोर की आवाज आने लगी और उन्हीं आवाज के बीच एक महिला की तेज आवाज में डाॅटने की आवाज आयी जो कि  हाउस कीपर की सख्त आवाज थी।
हाउस कीपर-’’इतना शोर क्यों हो रहा यहाँ से तुम लड़कियों शांन्ति से नहीं सकती। 
चलो नीचे चलो वार्डन मैम आॅफिस में बुला रही है आज से आपकी नयी वार्डन ज्वाइन किया है?’’
अचानक बिल्कुल शांति का माहौल.............
फिर एक स्वर में लड़कियों की आवाज
यह मैम हम लोग आते है, आप चलिए। 
सपना भी महक के साथ वार्डन के रूम की ओर गयी।
रास्ते में फिर लड़कियों के कानाफूसी की आवाज...................
’’यार आज तो ज्यादा हल्ला हो गया’’
हो यार, कही मैम घर फोन न कर दें’’
’’क्या करेंगी कुछ नहीं’’
’’हाँ’’ और ’’नहीं’’ तो क्या ये हमारी लाइफ है.............
शंाति से डाॅट सुन लेगे...........और फिर वापस जिदंगी शुरू’’
’’चलो पहले नयी वार्डन से मिले तो...................
लड़कियाँ जब वार्डन रूम में पहुॅची तो उन्होनें वहाॅ पुरानी मैडम ही बैठी थी।
-’’ कहाँ है मैम आॅफिस में तो सिर्फ पुरानी वाडेन में बैठी है, 
महक ने  खिड़की से देखा’’
हाउस कीपर मुस्कुराते हुए ’’अरे अपने पीछे देखो जहाँ लड़कियों खड़ी आपस में कानफूसी कर रही थी वही सीढ़ी के पास तो नयी मैम खड़ी थी।
लडकियों की आवाज-’’गुड मार्निग मैम’’
’’ -’’साॅरी मैम’’
’’ -’’मैम आप तो बहुत यंग हो’’
’’ -’’हाँ हमें तो बहुत नयी लड़की होगी’’
’’ -’’मैम आप नाराज मत होना।’’
वार्डन मैम की आवाज-हँसते हुए-’’ थैक्स - थैक्स कोई बात नहीं तुम कैसे पहचानती यह तो मेरी उम्र कम है जो तुम सब में मिल गयी। यह मेरी पहली जाॅब है हम भी अपना घर छोड़कर इतनी दूर आये है, तुम सबके लिए।
चलो तुम सब वाडेन रूम में आओं........
सबके एक साथ चलने की आवाज...........
दृश्य-2
तो यह आपकी नयी वार्डन है, खैर मैं तो आज से जा रही हूँ और नये  वर्ष की ढेरों शुभकामनाएँ ये है..........ये है..............(नाम भूलने की अदा) 
बाल पकड़ते हुये नयी वार्डन..............
मैं हूँ मिस रीना.........आज ही ज्वाइन किय हमारी मुलाकात तो बाहर हो चुकी है। 
’’जी मैम’’-लड़कियों का एक स्वर में जवाब। 
वार्डन-’’ तो ध्यान से सुनो यह भी आप लोगों का एक घर है। इसे साफ रखना, आपस में प्यार से रहना और नियमों का पालन करना। लड़कियों हम एक  परिवार है सब अपने घरों से दूर रहते है। 
लड़कियाँ-’’जी मैम हम आपको शिकायत का मौका नहीं देंगे। 
वार्डन-’’ यह हाॅस्टल शहर से दूर है तो इस शहर से दूर है तो इस बात का विशेष ध्यान रखना कि शाम 7 बजे तक सारी लड़कियाँ हाॅस्टल वापस आ जाये। देर तक बाहर ना रहे...................बिना सूचना, एटलीकेशन दिये बाहर ना जाये। 
दिवारों और हास्टल की सफाई का ध्यान रखे। अब आप सब जाइये आपको कोई शिकायत या परेशानी हो तो शिकायत पटी में लिख कर डाल दे। आपकी शिकायत पर तुरंत कार्यवाही होगी। मेरा फोन नं0 नोटिस बोर्ड पर है आप कभी भी किसी भी समय फोन कर सकती है और हाँ एक बात जरूर ध्यान रखियेगा सभी लड़कियाँ अनुशासन का विशेष ध्यान रखेंगी। 
लड़कियों के स्वर में-’’थैक्यू मैम, हैव ए नाइस डे हम चलते है। 
हाउसकीपर की आवाज--’’वार्डन मैम आप जरा बचके रहियेगा।
वार्डन मैम ’’हँसते हुये’’- सब बच्चे है आप चिन्ता न करें। अग मुझे इतना अपना घर याद आता तो यह तो मासूम है कोई अपराधी नहीं।’’
दृश्य-3
जल्दी ही वह दोनों अच्छी सहेली बन गयी । दोनो विपरित स्वभाव के होने के बाद भी एक दूसरे की हमदर्द थी । 

सपना-’’यार तुम तो मुझे छमू लमंत पार्टी घूमाने वाली थी।..........अब क्या?
महक-’’अब क्या अब भी चलेगे, तुम बस तैयार रहना।
सपना-’’पर कैसे पार्टी तो रात को होती है और हम सात के बाद बाहर नहीं रह सकते’’
महक यार तुम लोग तो बेकार में चिन्ता कर रही हो मैम डाटेगी और वापस फिर से अपनी जिन्दगी फिर से अपनी जिन्दगी शुरू.......ये हमारी लाइफ है। 
सपना-’’यार तुम जो जानती हो इतनी देर बाहर रहने का नियम नहीं है।
महक- यह नियम कायदे नाटिस बोर्ड पर चिपकने को होते है हमारे लिए नहीं’
सपना-क्या कह रही हो, हम कैसे मैनेज करेंगे?
महक-’’ हम है तो क्या गम है? हम तो इस हाॅस्टल के अन्दर होली खेल चुके है, मेरा कोई काम रूकता नहीं...........तुम्हें डर लग रहा तो सोच लो मेरा तो हर पार्टी अटैंड करने का प्रण है और मैं कँरूगी।’’ 
सपना-’’ पर कैसे?’’
महक-’’ वह मुझ पर छोड़ दो, बस तुम बताओं तुम्हें चलना है या नहीं’’?
सपना-’’ हाॅ लेकिन कैसे?’’
महक-’’ वह तुम मुझ पर छोड़ दो। हम सुबह-सुबह ही हास्टल में एपलीकेशन देकर चले जायेगे और फिर पूरा दिन अपना, यह हमारी लाइफ है। दिनभर मस्ती करेंगे। मेरे ब्यायफ्रेन्ड आकाश ने सब प्लान कर लिय है वह अपने दोस्तों को छमू लमंत पार्टी दे रहा और मैं उसमें शामिल न हूँ यह हो नहीं सकता।
सपना-’’मै तो पहली बार किसी ऐसी पार्टी में जाऊँगी जहाँ लड़के होगे? 
महक-’’लाइफ में हर काम पहली बार होता है। लाइफ मोबाइल बिना और पार्टी लड़कों बिना सूनी होती है मेरा नाम है महक और मैं अपनी लाइफ किसी बंधन में नहीं जी सकती। 
सपना हँसते हुए हाँ यह हमारी लाइफ जो है। 
दृश्य-4
-’’हैलों आकाश की आवाज
-’’हैलो -महक
-’’यार एक प्राब्लम है, देर रात तक पार्टी की परमिशन नहीं, ध्वनी प्रदूषण वालों ने वैन लगाया है, तुम्हें रात हाॅस्टन लौटना होगा।’’
महक-’’क्या यार ये प्रदूषण वाले क्या जिदंगी। में नरक करते पूरी पार्टी का मजा खराब करते। रात में हास्टल कैसे जाऊँगी। सपना भी होगी, नयी वार्डन भी आयी है। इसमें तो अच्छा हम न आये।’’ 
आकाश-’’नहीं-नहीं तुम्हें आना होगा तुम्हारे बिना कैसा छमू लमंतघ् मैं तुम्हें अपनी कार से वापस हास्टल छोड़ दूगां’’ तो हम मैनेज कर सकते हैं।’’
आकाश-’’यह हुयी न बात-----

दृश्य-5 
दृश्य-डिस्क
कलाकार- भीड़ ,, डिस्क का शाॅट

पार्टी अपने पूरे रंग में थी हल्का गाना, मस्ती डांस का महौल। 
महौल के बीच महक डिस्क बार में थिरक है। झूम रही है। 
बैकग्राउड से गानों की आवाज.......................
महक- ’’कैसी लगी पार्टी’’
सपना- ’’बहुत अच्छी, बहुत मजा आया।
अचानक टेबुल की ओर इशारा करती, बिन्दास महौल थिरकते कदम, हल्की इस्माइल, खुशदिल महौल में अकाश को आवाज देती।
महक- आकाश , आकाश
टेबुल से आकाश - ‘‘या महक’’
महक- ‘‘आ ना डांस करते है’’।
आकाश - नही यार मैं थक गया हूॅ। 
महक- क्या थक गये इतने जल्दी आ ना कितना मजा आ रहा, आ ना
आकाश के पास खीचतीं सी..............
आकाश भी उठ कर आ जाता है। 
दोनों डांस करते है...................
अकाश- वाॅव महक तू कितना अच्छा डांस करती। 
महक- ‘‘अच्छा-वच्छा का पता नही, बस आई लव यू डांस’’ बचपन से किसी से यह कह पायी ना कभी खुल कर यह आजादी। 
महक- ‘‘बस आज की रात दे दो कुुछ पल दे दो, कल से तो मैं गाॅव जा रही, फिर पता नही कब मुलाकात हो? 
आकाश - ‘‘रोज-रोज’’
आकाश महक को टेबुल के पास ले जाता, आंखें बन्द करों। 
महक- ‘‘क्या है, बताओं ना?
आकाश प्लीज आॅखें बन्द करों ना , प्लीज। 
महक आॅखें बन्द करती है।
अर्पित अब हाथ आगे करों। 
महक हाथ आगे करती है। 
आकाश उसके हाथ में दो मोबाइल रखता है। 
महक- आॅख खोलती- ‘मोबाइल’?
संदीप - आॅख के इशारे से हां करता है, फिर प्यार से महक का हाथ पकड़ कर कहता- ‘बाबू, मैं भी तुम्हारे बिना जी नही सकता, तुम मेरी आदत जरूरत, चाहत बन गयी हो, मैं जानता हूॅ कल से हम अलग हो रहे, कालेज, पढ़ायी, मस्ती, सब खत्म..............बस होगी तो यादें।
महक- ‘‘तब ही तो मै। आज और पल तुम्हारे साथ जीना चाहती। थैंक्स। 
संदीप - किस बात का?
‘‘मोबाइल का’’ महक
‘‘तो तुझेे क्या लगता है कि मैं जी सकता तुम्हारे बिना रह सकता बिना बात किये रह सकता, अच्छा सुन यह देख मैं सारे फंक्शन समझा देता तुम्हें’’
महक- हॅू।
देख यह कैमरा है, यह रेडियों, गाने और रात 12 से सुबह 6 तक फ्री रहेगा। 
महक- अच्छा।
आकाश - अच्छा तुम ठीक से बैठों, तुम्हारी एक फोटो लेनी है। 
महक- अच्छा रिकार्डिंग भी’
आकाश - हाॅ
महक खुशी से बच्चों की तरह उदलते हुए डांस फ्लोर की ओर- ‘‘प्लीज मेरे डांस की रिकार्डिंग कैसी लगती हॅू’’।
आकाश - अरे हो।
और महक के डांस को रिकार्ड करने लगता।
महक और मस्ती से डांस कर रही, खिला-खिला। गुनगुना रही। 
आकाश अचानक बेटर को आवाज देता- ‘बेटर’
आकाश यह फोन पकड़ और हमारे डांस की रिकार्डिंग कर’ मोबाइल वेटर को देते हुए स्टेज की ओर भागता है’’। 
वेटर मुस्कुराता हुआ रिकार्डिंग करने लगता है। 
थोड़ी देर बाद दोनों टेबल पर आकर बैठते है। 
आकाश - आज का दिन बहुत खास है।
महक- मेरे लिए भी कल से ना जाने कैसे रहूंगी। 
आकाश - चिंता न कर पागल मैं जल्दी कोई अच्छी नौकरी खोज लूंगा, फिर आऊंगा। ना तेरे बाबा से हाथ मागनंे। 
महक- ‘‘सच्ची मुझे भूल तो ना जाओगें। 
आकाश उसके होंठों पर अंगुली रखकर...........मरते दम तक नही।
महक- जानती हूं कि तुम मेरा हर महक पूरा करोंगे मेरा साथ कभी मत छोड़ना।
आकाश - कभी नही। 
महक के हाथांे पर हाथ रखकर।
‘‘अब चल बहुत देर हो रही । अकाश
अचानक महक टेबुल पर रखे गिलास को झटके से दी जाती। 
आकाश - यह क्या यार टाªई करने के ठीक, यह एक साथ पूरा गिलास नही.....................
महक- हल्के नशे में.....
पहले तो लत लगाते, फिर दूर जाने की बात करते, मुझ गवार को छोड़ेगे नही। 
आकाश - पागल तुझे चढ़ गयी है, चल घर चल। ठीक है हम बड़े शहर मंे रहते, पर पले-बढ़े तो गाॅव की मिट्टी में हैं। अब घर चल।
महक टेबुल पर रखपे मोबाइल को पर्स में रखते हुए आकाश का सहारा लेते हुए बाहर जाती है। 
वेटर जाते-जाते पीछे से साहब-टिप। यह आपका मोबाइल हा यार जल्दी-जल्दी में भूल गया। 
आकाश जब से उसे पैसे निकाल कर दे देता, अचानक उसके जेब से कुछ पर्चा गिरता जिसे वह बिना देखे निकल जाता। 

दृश्य-6
बाकी सब तो अपने घर चले जाते है। सपना भी हाॅस्टल को निकल जाती है लेकिन महक ने जोश में इतनी पी ली कि अपने होश खो बैठी । आकाश महक को अपने साथ ले जाता है। 
सड़क पर बाइक दौड़ती............
आगे आकाश पीछे नशें में महक............
महक- थैंक्स आज मैंने भी तुम्हारी वजह से एक शहरी लड़की की जिन्दगी जी। 
आकाश - थैंक्स मत बोल तेरा महक पूरा करना मुझे भी अच्छा लगता............... काश मैं तुम्हारे हर अरमान पूरे कर सकूं। 
महक- अरे प्लीज आज हास्टल नही। 
आकाश - क्योें?
महक- मैं इस हालात, कपड़ों में हास्टल गयी तो वार्डेंन मैंम मार डालेगी।
अकाश- फिर कहां।
महक- कही भी, बस हास्टल नही........आज मैंने बोल दिया है कि रात मैं एक दोस्त रहूंगी। 
अकाश- बे ऐसा क्यांे। 
महक- आज की रात मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती। हर पल.तुमने भी कल कहा था। 
अर्पित- लेकिन मैं अब तुझे लेकर कहां जाऊं, भावनाओं में बहककर कह दिया।
महक- लेकिन मैंने तो तुम्हारी ख्वाहिश को पूरा करने ऐसा किया।
अकाश- लेकिन मैं इतनी रात तुझे कहां ले जाउ।
महक- कही भी लेकिन हास्टल नही अच्छा चलों अपने रूम ले चलों। 
अकाश- आर यू श्योंर  पक्का।
महक- नशें में झूमती पक्का।
दृश्य-7
कमरे का लाक टटोलते हुए अकाश अन्दर आता, पीछे-पीछे महक
बेड के बगल में महक की फोटो फ्रेम में
महक- ‘‘मेरी फोटो‘‘
अकाश- हाँ तुम्हें देखे, सोचे बिना नींद ही कहाँ आती
महक- सच
अचानक रूम का बिखरा सामान देख ठीक करती, लड़खड़ाते
कदमो से..........
अकाश- उसकी रिकाार्डिग फिर करने लगता?
महक- यह क्या?
अकाश- मेरे कमरे में कुछ हसीन यादों को इस मोबाइल
में कैद करना चाहता......
महक- मुस्कुराने लगती........ हसी की आवाज
अकाश- अचानक मोबाइल आॅन करके साइड टेबुल पर रख
देता, और धीरे से महक के करीब आता
‘‘जान हमेशा यूॅ ही मुस्कुराना‘‘
महक- ‘‘तुम भी ऐसे ही हमेशा साथ देना
दोनो की नजदीकियाॅ बढ़ती है।
गाना बज रहा।
आचनक आकाश बोला - ’’मजा तो तुम लोगों के रहने से रहा वरना यह पार्टी, मस्ती सब बेकार....................अच्छा यह बताओं हाॅस्टल में क्या बोला?
’’अरे तेरी भूल गयी...........महक
क्या करती हो मैम को फोन लगाओं...............
महक ’’आकाश म्यूजिक बंद कर दो मिनट को’’
ट्रिन,ट्रिन......................(खामोशी में मोबाइल की रिंग...............)
हैलो................वार्डन की आवाज
’’ मैम हम जाम में फँस गये है, आने में देर होगी।’’ महक
’’ बेटा तुम्हें समय से आना चाहिए था जानती हो ताकि हास्टल का रास्ता कितना सुनसान है। अच्छा होता अगर आप लोग वही अपनी आंटी के यहाँ रूक जाते। 
’’नहीं हम रास्ते में है आप परेशान मत हो हम गाड़ी से है ...................साॅरी मैम आगे से हम ऐसा नहीं करेंगे।’’
वार्डन मैम परेशान होतु हुए-’’ तुम सब समझते नहीं तुम्हें कुछ हो गया तो हम तुम्हारे माता-पिता को क्या जवाब देंगे। हम जाग रहे है तुम जल्दी आओं’’
’’जी मैम’’ महक
फोन रखते हुये वार्डन मैम का बुदबुदाना-’’ यह लड़कियाँ भी समझती नहीं--- कहाँ फँस गये ये वार्डन की नौकरी तो ..........लेकिन हम वार्डन का दर्द समझता कौन? कोई होनी अनहोनी हुयी तो ले दे के इल्जाम वार्डन पर आ जायेगा।
महक- ’’म्यूजिक शुरू’’.........
फिर वहीं हल्ला मस्ती अब तक उसका नशा भी कम होने लगा था, उसे माॅ- पापा के नाम से ही डर लगता था। 
डरते-डरते आकाश से बोली - जल्दी हास्टल छोड़ दो ।
दृश्य-8
टैªफिक का शोर-’’आकाश गाड़ी जल्दी चलाओं’’
महक-हाँ वार्डन मैम बहुत गुस्सा करेगी---
आज तो पक्का नोटिस है।
आकश-’’अरे यार जो होगा सो होगा अभी तो इन्जाय करों, सुनसान रात में लाॅग ड्रइव का मजा ही कुछ और होता है। थैक्स महक तुमने पार्टी में आकर मेरा छमू लमंत खुशियों से भर दिया। 
आकाश का गुनगुना-’’ आने से तेरे आये बाहर तेरे जाने से तेरे जाये बहार.........
आकाश सामने देखो वह बाइक सवार ड्रिंक करके चला रहा है--बचों आकाश गाड़ियों के भीड़ने (एक्सीडेंट की आवाज) 
दृश्य-10
वार्डन मैम-’’देखा तुम लोगों के झूठ बोलने का अंजाम’’
सपना रोते हुए-’’साॅरी मैम, प्लीज महक और आकाश को बचा लिजिये।
मैं क्या करूँ.... अब तो भगवान या डाक्टर ही कुछ कर सकते।

सपना- मैम प्लीज इसके पापा से कुछ मत कहना, वह पढ़ाई छुड़ा देंगे। उन्होंने लोन लिया है इसको पढ़ाने को....
 वार्डन मैम-’’ अब कुछ नहीं हो सकता । घर पर खबर तुम सबके जा चुकी है। सब आते ही होगे।
 आकाश और महक पिछले 7 घंटे से बेहोश है पता नहीं इतने भयानक एक्सीडेंट से बच भी पायेगें या नहीं। न जाने तुम सब समझते क्यों नहीं अनुशासन और नियम भलाई के लिए होते। कुछ पल की मस्ती और मजे के लिए अपनी जिंदगी को खतरे में डाल देते। खैर तुमने यह बहुत अच्छा किया कि इन सबको समय से अस्ताल ले ले आयी। यह आगे की सीट पर थे तुम्हारी किस्मत अच्छी थी जो इतने बड़े एक्सीडेंट से बाल बच गयी। बस मामूली चोट आयी है। 
महक को होश आ गया-डाक्टर की आवाज अब कैसी हो? वार्डन की आवाज
महक रोते हुये-’’ बहुत कमजोरी लग रही और दर्द भी है साॅरी मैम माफ कर दो। 
देर से सही लेकिन तुम्हें अनुशासन व जिन्दगी की कीमत तो पता चली। 
मैम आकाश कैसा है?
डाॅक्टर ’’वह भी खतरे से बाहर है’’
वार्डन मैम- जो हुआ उस गलती से सबक लो। मैं तुम्हारें माता-पिता को समझा लूँगी। लेकिन फिर ऐसा मत करना। 
नया साल, नयी सीख और नया जीवन मुबारक हो।

डॉसाधना श्रीवास्तव



Monday, October 16, 2017

कोशिशें कभी हारती नहीं

कोशिशें कभी हारती नहीं
एक अंतहीन उदासी और मैं थी.............
न कोई साथी ना मंजिल बस मैं थी.........
साथ कोई तो सिर्फ मेरी कोशिशें थी
सुना था कभी यह कभी हारती नहीं थी
थोड़ा  किस्मत ने मुझे आजमाया, मैनंे कोशिशों को
हर बार जीत जाये कोशिशें जरूरी तो नहीं
हर कोशिश के साथ हार थी और मै थी
सोंचती थी जी जाऊॅगी इस बार
हर हार के साथ यह आस थी और मै थी।
एक ओर जमाना था एक और मै थी
हारने से लगी थी जब मैं
तब लगा किसी हाथ है मेरे सिर
अब ईश्वर का था साथ और मै थीं
अंत आते-आते जीत गयी
अब जीत थी, और मै थी
सच कहते थे सभी कोशिशे कभी हारती नहीं।

डॉसाधना श्रीवास्तव 


Monday, October 9, 2017

विद्रोही मन

विद्रोही मन


समाज अपनी कहता है अपने ही रचता है जाल ,

उन जालों को काट नये रास्ते तलाशता है मेरा विद्रोह मन,

समाज के नीतिगत नियमों में चाहता है बदलाव विद्रोही मन कुछ सोचता है,

देखता फिर कुछ ऐसा है जो रोकता है,

कर देता है उन परम्पराओं को मानने से इंकार ,

जिसमें सदियों तक नहीं हुआ कुछ बदलाव,

बदलाव ऐसा बदलाव जिसने मेरे मन को विद्रोह ना किया होता है।

मुझे तो छोडिये कम से कम उन परम्पराओं ने किसी का तो भला किया होता है



समाज कहता है मुझे विद्रोही,

परन्तु मुझे समाज ने ही ऐसा किया जो नहीं दे सकता है,

किसी तर्क का प्रतित्तर।
डॉ. साधना श्रीवास्तव 

Friday, August 25, 2017

सत्य से साक्षात्कार एक बार

सत्य से साक्षात्कार एक बार
अंतिम सत्य है वह, 
मेरे ही नहीं सब के लिए,
कैसा होगा वह क्षण जो उससे होगा मिलन, 
कभी डर लगता तो कभी होती है, 
उत्सुकता पूरे शरीर में, 
एक क्षण में रूक जायेगा रक्त का बहाव,
 या पहले होगी हृदय गति बंढ, 
हाथ पाॅव के साथ पूरा शरीर जमने लगेगा बर्फ सा उसी क्षण मुक्त हो जाऊॅगी, 
 हर बंधन से शरीर में अकड़न और उस क्षण सांसे रूक जायेगी होता ह,ै 
आशान मृत्यु का तब करीब आ जाती है ।
जीवन के एहसास होती है जीवन की खूबसूरती यादें आने लगते है ,
सारे अधूरे काम अचानक से बढ़ जाता है, 
रिश्तों से मोह बस उसी पल होता है ,
सत्य से साक्षात्कार मैं अपनी उदासी से जाग जाती है, 
बस जी लेना चाहती हूॅ जिंदगी को खुलकर मृत्यु से पहले एक बार। 

Tuesday, August 15, 2017

Wednesday, May 17, 2017

अमरत्व

अमरत्व
अमरत्व क्या है सोंचने की बात
अपने जीवन का मना लो उत्साह
बहुत मुश्किल से मिलता है मानव जीवन
करने पड़ते है बहुत तप और मनन
अपने जीवन में करो चितंन
खोजो अपने उद्देश्य को
भटको इधर-उधर
हमेशा सिर्फ अपने दिल की सुनो
रास्तों के उतार चढ़ाव से डरो
जीवन में कोई भी अमरत्व का फल खाकर नहीं आता
परंतु निश्चित ही वह अमरत्व को पाता जो
अपने जीते-जी अपने और अपनों के ही नहीं
दूसरों के काम आता है

सच मायनों वही मनुष्य अमरत्व को पाता।

डॉ साधना श्रीवास्तव